नई दिल्ली: नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान यूनियनों ने मंगलवार को कहा कि आगे की बातचीत के लिए केंद्र सरकार के प्रस्ताव पर फैसला बुधवार तक के लिए टाल दिया गया है. इस बीच किसान तीनों कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की मांग पर अडिग हैं. Also Read - अमित शाह बोले- कृषि कानून से दोगुनी होगी आय, राकेश टिकैत ने कहा- हम आंदोलन खत्म नहीं करेंगे, किसी भी जांच से नहीं डरते

किसान नेता कुलवंत सिंह संधू ने दिल्ली के सिंघू बॉर्डर पर संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि पंजाब के 32 किसान यूनियनों ने बैठक की और आगे के कदम के बारे में विचार विमर्श किया. Also Read - COVID-19 vaccination in India: भारत में दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान शुरू, लगभग दो लाख कोरोना योद्धाओं को दी गई पहली खुराक; बड़ी बातें

उन्होंने कहा कि देश भर के किसान नेताओं की एक बैठक बुधवार को होगी, जहां बातचीत के लिए सरकार के प्रस्ताव पर फैसला किया जाएगा. Also Read - Corona Vaccination in India, Day 1: सफल रहा टीकाकरण अभियान का पहला दिन, 1,91,181 लोगों को लगाया गया टीका

संधू ने कहा कि वे ब्रिटेन के सांसदों को भी पत्र लिखेंगे और उनसे आग्रह करेंगे कि वे 26 जनवरी को भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल नहीं होने के लिए अपने प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन पर दबाव डालें. जॉनसन अगले महीने होने वाले कार्यक्रम में मुख्य अतिथि होंगे.

केंद्रीय कृषि मंत्रालय में संयुक्त सचिव विवेक अग्रवाल ने रविवार को 40 किसान यूनियनों के नेताओं को पत्र लिख कर कहा था कि वे कानूनों में संशोधन के उसके पहले के प्रस्ताव पर अपनी चिंताओं को स्पष्ट करें और अगले दौर की बातचीत के लिए किसी सुविधाजनक तारीख का चुनाव करें ताकि चल रहा आंदोलन जल्द से जल्द समाप्त हो सके.

उल्लेखनीय है कि तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने की अपनी मांग से पीछे हटने से किसान संगठनों के इनकार करने के बाद बने गतिरोध के बीच नौ दिसंबर को छठे दौर की वार्ता रद्द हो गयी थी.

(इनपुट भाषा)