कांग्रेस ने बुधवार को घोषणा की कि उसके दोनों समाचार पत्र नेशनल हेराल्ड (अंग्रेजी) और नवजीवन (हिंदी) का प्रकाशन फिर शुरू होगा। पार्टी ने नीलाभ मिश्र को एडिटर-इन-चीफ (प्रधान संपादक) नियुक्त किया है। कांग्रेस के मुताबिक, आगामी महीनों में दोनों समाचार पत्रों का प्रकाशन फिर से शुरू होगा, और उसके बाद उर्दू अखबार ‘कौमी आवाज’ को फिर से शुरू किया जाएगा। नीलाभ मिश्र इससे पहले आउटलुक हिंदी के संपादक थे।

कांग्रेस के कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा ने एक बयान में कहा, “पंडित जवाहर लाल नेहरू द्वारा 1937 में स्थापित की गई कंपनी ‘द असोसिएटिड जर्नल्स लिमिटेड’ ने अपने अंग्रेजी और हिंदी समाचार पत्रों नेशनल हेराल्ड और नवजीवन का प्रकाशन फिर से शुरू करने के लिए कदम उठाए हैं।”

बयान के मुताबिक, “कंपनी ने वरिष्ठ पत्रकार नीलाभ मिश्र को तत्काल प्रभाव से अपने हिंदी और अंग्रेजी समाचार पत्र और डिजिटल संस्करणों का प्रधान संपादक नियुक्त किया है। बयान में आगे कहा गया है कि मिश्र नेशनल हेराल्ड, नवजीवन और डिजिटल संस्करणों का नेतृत्व करेंगे।

आगामी प्रकाशनों की टैगलाइन है ‘स्वतंत्रता संकट में है, अपनी पूरी शक्ति से इसकी रक्षा करें।’

बयान के मुताबिक, “प्रकाशन पंडित नेहरू के दृष्टिकोण को आवाज देने और एक उदार, प्रगतिशील, धर्मनिरपेक्ष स्थान बनाने का प्रयास करेंगे।”

बयान में आगे कहा गया है, वे (प्रकाशन) उन सभी का प्रतिनिधित्व करने का प्रयास करेंगे, जिनकी आवाज को दबाया गया है और इस प्रकार वे एक मिश्रित, लोकतांत्रिक समाज के आदर्शों को बढ़ावा देंगे।

क्या है नेशनल हेराल्ड:

नेशनल हेराल्ड नामक अखबार की शुरुआत देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू द्वारा साल 1938 में लखनऊ में की गई थी। इस अखबार का हिंदी अर्थ भारत का अग्रदूत था। शुरु-शुरु में अखबार में ये लाइने लिखी होती थीं Freedom is in Peril, Defend it with All Your Might, इसका मतलब स्वतंत्रता खतरे में हैं और हमें इसकी रक्षा करनी है।

जवाहर लाल नेहरू इसके पहले संपादक थे। साल 1942 में अंग्रेजों ने इंडियन प्रेस पर हमला कर दिया था जिस वजह से इस अखबार को बंद करना पड़ा। साल 1942 से लेकर 1945 तक अखबार का एक भी अंक प्रकाशित नहीं हुआ। साल 1945 के खत्म होते होते इस अखबार को एक बार फिर से शुरु करने की कोशिश की गई।

आज़ादी से पहले जवाहरलाल नेहरू इसमें बेहद सक्रिय थे। नेहरू ने एक बार लखनऊ में नेशनल हेरल्ड के कर्मचारियों के सामने स्वीकार भी किया था, “हमें बनियागीरी नहीं आई।” नेहरू का जुड़ाव 1938 में स्थापित इस अख़बार से इतना ज़्यादा था कि उन्होंने ऐलान कर दिया था, “मैं नेशनल हेरल्ड को बंद नहीं होने दूंगा चाहे मुझे आनंद भवन (इलाहाबाद में मौजूद पारिवारिक घर) बेचना पड़े”।

कई बार नेहरू ने बतौर प्रधानमंत्री अपने विचार स्पष्ट रूप से कहने के लिए नेशनल हेराल्ड का इस्तेमाल किया। जाने माने पत्रकार इंदर मल्होत्रा के अनुसार अप्रैल, 1954 में जब अमरीका ने बिकिनी द्वीपसमूह में परमाणु परीक्षण किए तो लखनऊ में मौजूद नेहरू ने किसी भी रिपोर्टर के सामने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और सीधे नेशनल हेरल्ड के कार्यालय पहुंचे। उन्होंने “अपने नाम से एक तीखा लेख लिखा, जिसका शीर्षक था ‘मौत का सौदागर’।

राजीव गांधी की मौत के बाद नेशनल हेरल्ड का पतन बहुत तेजी से हुआ। नेशनल हेरल्ड लखनऊ की ‘नेहरू मंजिल’ से प्रकाशित होता था। अब आरोप है कि गांधी परिवार ने हेराल्‍ड की संपत्तियों का अवैध ढंग से उपयोग किया है।

साल 2008 में इस अखबार को पूरी तरह से बंद कर दिया गया। इस अखबार का मालिकाना हक एसोसिएट जर्नल्स को दे दिया गया। इस कंपनी ने कांग्रेस से बिना ब्याज के 90 करोड़ रुपए कर्जा लिया। लेकिन अखबार फिर भी शुरु नहीं हुआ। 26 अप्रैल 2012 को एक बार फिर से मालिकाना हक का स्थानांतरण हुआ। अब नेशनल हेराल्ड का मालिकाना हक यंग इंडिया को मिला।

यंग इंडिया में 76 फीसदी शेयर सोनिया गांधी और राहुल गांधी के पास हैं। जानकारी के मुताबिक यंग इंडिया ने हेराल्ड की संपत्ति महज 50 लाख में हासिल की जिसकी कीमत करीब 1600 करोड़ के आस पास थी। तात्कालीन जनता पार्टी नेता और मौजूदा भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने आरोप लगाया कि हेराल्ड की संपत्तियों को गलत ढंग से इस्तेमाल में लिया गया है। स्वामी इस मामले को साल 2012 में कोर्ट तक खींच ले गए।

भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने सोनिया और राहुल के खिलाफ कर चोरी और धोखाधड़ी का आरोप लगा शिकायत दर्ज कराई। उनकी शिकायत के बाद दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने ईडी को इस मामले में जांच के निर्देश दिए और सोनिया और राहुल पर प्राइमरी जांच का केस दर्ज किया गया। दोनों पर फेमा नियमों का उल्लंघन करने पर मामला दर्ज किया गया।

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी  और साथ ही यंग इंडियन के दो अन्य डायरेक्टरों-पूर्व पत्रकार सुमन दुबे और टेक्नोक्रेट सैम पित्रोदा को भी समन जारी कर कोर्ट में पेश होने के लिए बोल दिया। ऐसा होने पर कांग्रेस नेताओं ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।

कांग्रेस की ओर से दायर याचिका में सोनिया गांधी और राहुल गांधी को कोर्ट में पेश होने से छूट दिए जाने की मांग की गई थी। दिल्‍ली हाईकोर्ट ने मामले में पटियाला हाउस कोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया। इसके अलावा कोर्ट ने यह भी कहा कि सीआरपीसी के सेक्‍शन 91 के तहत कोई भी ऑर्डर देने से पहले आरोपी पक्ष को सुना जाना जरूरी है लेकिन इस मामले में पटियाला कोर्ट ने आरोपी के पक्ष को बिना सुने ही ऑर्डर दे दिया।
फिलहाल नेशनल हेराल्‍ड केस में कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी को राहल मिली है।