नई दिल्ली. पुलवामा आतंकी हमले को लेकर पाकिस्तान पूरी दुनिया में अलग-थलग पड़ता नजर आ रहा है. भारत में आतंकवादी गतिविधियों को शह देने को लेकर भारतीय कूटनीतिज्ञ शुरू से ही पाकिस्तान पर आरोप लगाते रहे हैं. पुलवामा आतंकी हादसे के बाद भारत का यह दावा और पुख्ता होता दिखा. यही वजह है कि इस दर्दनाक हादसे के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देशों का ध्यान पाकिस्तान में रहकर आतंकी घटनाओं को अंजाम देने वाले जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर की तरफ गया है. एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत “अगले कुछ दिनों” में फ्रांस संयुक्त राष्ट्र में मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगवाने के लिए एक प्रस्ताव लाएगा. इससे पहले इजरायल ने भी आतंकवाद को खत्म करने में भारत को बिना शर्त समर्थन देने का एलान किया है.

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एक फ्रांसीसी सूत्र ने मंगलवार को यह जानकारी दी. संयुक्त राष्ट्र द्वारा निषिद्ध संगठन जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख अजहर ने हाल में पुलवामा में हुए आत्मघाती आतंकी हमले की जिम्मेदारी ली थी जिसमें 40 सीआरपीएफ कर्मी शहीद हो गए थे. यह दूसरा मौका होगा जब फ्रांस संयुक्त राष्ट्र में ऐसे किसी प्रस्ताव के लिए पक्ष बनेगा. 2017 में अमेरिका ने ब्रिटेन और फ्रांस के समर्थन से संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध समिति 1267 में एक प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन के प्रमुख पर प्रतिबंध की मांग की गई थी. इस प्रस्ताव पर चीन ने अड़ंगा लगा दिया था.

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एक वरिष्ठ फ्रांसीसी सूत्र ने बताया, “फ्रांस संयुक्त राष्ट्र में मसूद अजहर को आतंकी सूची में डालने के लिए एक प्रस्ताव का नेतृत्व करेगा…यह अगले कुछ दिनों में होगा.” फ्रांसीसी सूत्रों ने बताया कि फ्रांस के इस फैसले पर फ्रांस के राष्ट्रपति के कूटनीतिक सलाहकार फिलिप एतिन और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के बीच आज सुबह चर्चा हुई. इस दौरान हमले को लेकर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए फ्रांसीसी कूटनीतिज्ञ ने इस बात पर भी जोर दिया कि दोनों देशों को अपने कूटनीतिक प्रयासों में समन्वय करना चाहिए.

(इनपुट – एजेंसी)