NEET JEE Exams: कोरोना महामारी में एनईईटी- जेईई परीक्षा लिए जाने का विरोध करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने कहा है कि इस महामारी के बीच परीक्षा लेने का कोई मतलब नहीं बनता, हम सभी को मिलकर इस परीक्षा को स्थगित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाना चाहिए क्योंकि ये लाखों छात्रों के जीवन से जुड़ा है. Also Read - चिकित्सा जांच के बाद स्वदेश लौटीं सोनिया गांधी, राहुल भी वापस आए

उन्होंने विपक्षी दल शासित प्रदेश के मुख्यमंत्रियों से आह्वान किया कि वो सभी एकजुट होकर इस होनेवाली परीक्षा को चुनौती दें. पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने बुधवार को महाधिवक्ता अतुल नंदा से सामूहिक रूप से समीक्षा याचिका दायर करने के लिए अन्य शासित राज्यों में अपने समकक्षों के साथ समन्वय करने के लिए कहा. Also Read - कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी हेल्‍थ चेक-अप के सिलसिले में गईं विदेश, राहुल गांधी भी हैं साथ

बुधवार को  सात विपक्षी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा बुलाई गई एक वर्चुअल  बैठक में जीएसटी मुआवजा जारी करने में देरी और खेत अध्यादेश सहित सामान्य चिंता के अन्य मुद्दों पर चर्चा की गई. Also Read - कांग्रेस में बड़ा फेरबदल, सुरजेवाला, तारिक अनवर, जितेंद्र सिंह कांग्रेस के नए महासचिव नियुक्त; प्रियंका को पूरी यूपी का प्रभार

अमरेंदर सिंह ने कहा कि दुनिया भर में ऑनलाइन परीक्षाएं आयोजित की जा रही हैं.  उन्होंने सुझाव दिया कि जेईई और एनईईटी और अन्य व्यावसायिक परीक्षा जैसे चिकित्सा और कानून की परीक्षा भारत में भी ऑनलाइन आयोजित किए जा सकते हैं. परीक्षआ के लिए छात्रों को जोखिम में डालने की कोई आवश्यकता नहीं है.

अमरिंदर सिंह ने यह भी खुलासा किया कि उनकी सरकार राज्य की शिक्षा प्रणाली और वित्त पर नई शिक्षा नीति के प्रभाव का आकलन करने के लिए जल्द ही एक समिति का गठन की जाएगी.उन्होंने कहा कि परिदृश्य शारीरिक परीक्षाओं के लिए अनुकूल नहीं थी.

मुख्यमंत्री ने बैठक में बताया कि कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के लिए अनिवार्य अंतिम परीक्षाओं के मुद्दे पर, बार-बार की दलीलों और याद दिलाने के बावजूद, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) उनकी सरकार की चिंताओं का संज्ञान लेने में विफल रहा.

“सितंबर में कोविड के चरम पर पहुंचने के बाद हम छात्रों का जीवन कैसे मुश्किल में डाल सकते हैं. छात्र ऐसी नाजुक स्थिति में परीक्षा कैसे दे सकते हैं?” उन्होंने पूछा, “मैं भी चाहता हूं कि छात्र परीक्षा दें और पास भी हों, लेकिन संकट के बीच में मैं यह कैसे कर सकता हूं?”

अमरिंदर सिंह ने अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना को निलंबित करने के केंद्र के फैसले का मुद्दा भी उठाया, जिनकी राज्य में संख्या 3.17 लाख है.