संगरूर (पंजाब): डेढ़ सौ फुट गहरे बोरवेल में गिरे दो साल के बच्चे फतेहवीर सिंह को बचाने का प्रयास सोमवार को भी जारी है. जिले के भगवानपुरा गांव में अपने घर के पास सूखे पड़े इस बोरवेल में गुरुवार शाम को फतेहवीर गिर गया था और उसे बचाने में अब 92 घंटे से अधिक का समय बीत चुका है. अधिकारियों ने बताया कि यह बोरवेल एक कपड़े से ढंका हुआ था. फतेहवीर खेलते हुए वहां पहुंचा और उसमें गिर गया. उसकी मां ने अपनी इस इकलौती संतान को बचाने की बहुत कोशिशें की, लेकिन वह इसमें नाकामयाब रही.

बचाव दल रविवार को उसके करीब पहुंच गया था लेकिन उसे निकाला नहीं जा सका क्योंकि कुछ तकनीकी समस्याएं सामने आ गईं थीं. अधिकारियों ने बताया कि बच्चे को खाना पीना तो नहीं दिया गया है लेकिन ऑक्सीजन की सप्लाई की जा रही है. बचाव दल में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), पुलिस, नागरिक प्रशासन, ग्रामीण और स्वयंसेवी लोग शामिल हैं. ये लोग तपती गर्मी की परवाह किए बगैर पूरी मेहनत से बचाव अभियान चला रहे है. बच्चे को बचाने के लिए बोरवेल के समांतर एक दूसर बोरवेल खोदा गया है और उसमें कंक्रीट के बने 36 इंच व्यास के पाइप डाले गए हैं.

घटना की जानकारी फैलते ही बड़ी संख्या में लोगों का हुजूम जमा हो गया और बच्चे को बचाने की प्रार्थनाओं का अनवरत सिलसिला चल रहा है. घटनास्थल पर कैम्प लगा कर राहत अभियान पर नजर रख रहे पंजाब के सार्वजनिक निर्माण विभाग मंत्री विजय इंदर सिंगला ने कहा कि हमारा मकसद केवल बच्चे को सकुशल बाहर निकालना है. इस घटना से कुरूक्षेत्र में 2006 में गिरे बच्चे प्रिंस को बचाने की याद ताजा हो गई हैं. प्रिंस को करीब 48 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाल लिया गया था.

कैप्टन ने ‘ओहदा’ घटाया तो शिकायत करने ‘सुपर कैप्टन’ के पास पहुंचे नवजोत सिंह सिद्धू, बयां किए हालात