भारतीय शटलर पीवी सिंधू (PV Sindhu) ने आज शुक्रवार को आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) के विजयवाड़ा (Vijayawada) के दुर्गा मंदिर (Durga temple) में पूजा की. ओलंपिक खेलों में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी सिधू ने कहा- “मैंने ओलंपिक से पहले भी यहां आकर मां का आशीर्वाद लिया था और ओलंपिक में खेलने के बाद एक फिर यहां मां का आशीर्वाद लेने आई हूं. आशा करती हूं कि मां का आशीर्वाद हमेशा मेरे साथ रहे.”Also Read - Vaccination Drive: पीएम मोदी के जन्मदिन पर रिकॉर्ड टीकाकरण, चौथी बार एक करोड़ का आंकड़ा पार- यह है लक्ष्य

बता दें मौजूदा विश्व चैम्पियन सिंधू ने टोक्यो खेलों में कांस्य पदक जीता था. उन्होंने पांच साल पहले रियो ओलंपिक में रजत पदक हासिल किया था. वह बीते बुधवार को अपने गृह नगर लौटी थीं, जहां भव्य स्वागत किया गया. राजीव गांधी इंटरनेशल एयरपोर्ट पर उनका स्वागत खेल मंत्री वी श्रीनिवास गौड़ और अन्य अधिकारियों ने किया था. उन्होंने पांच साल पहले रियो ओलंपिक में रजत पदक हासिल किया था. Also Read - Dulha Dulhan Ka Video: लैपटॉप लेकर स्टेज पर बैठ गई दुल्हन, दूल्हे का रिएक्शन देख लिया तो रुकेगी नहीं हंसी

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इस साल स्पेन में विश्व चैंपियनशिप खिताब बचाना है
ओलंपिक में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनी पीवी सिंधू ने अभी अपनी सफलता का पूरी तरह से जश्न भी नहीं मनाया है लेकिन फिर भी अपना अगला लक्ष्य तय कर लिया है, जो इस साल स्पेन में विश्व चैंपियनशिप खिताब का बचाव करना है.

व्यक्तिगत ओलंपिक पदक जीतने वाली देश की पहली महिला खिलाड़ी बनी थी
रविवार को 26 साल की सिंधू लगातार दो व्यक्तिगत ओलंपिक पदक जीतने वाली दूसरी भारतीय और देश की पहली महिला खिलाड़ी बनी थी. रियो 2016 में रजत पदक के बाद उन्होंने तोक्यो खेलों में कांस्य पदक जीता. सिंधू ने कहा था, निश्चित तौर पर अब तक इन भावनाओं से पूरी तरह से नहीं बाहर निकल पाई हूं लेकिन मैं इस लम्हें का लुत्फ उठा रही हूं. यह किसी के लिए भी सपना साकार होने की तरह है. ये ऐसे लम्हें हैं जिन्हें आप हमेशा याद रखते हो. सिंधु ने कहा था, ”ओलंपिक में लगातार दो पदक जीतना मेरे लिए बड़ी बात है. मुझे यकीन है कि यह अन्य लोगों को प्रेरित करेगा और खेल को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा.”

मैं निश्चित तौर पर 2024 पेरिस ओलंपिक में खेलूंगी
यह पूछने पर कि अब उनका लक्ष्य क्या है, सिंधू ने कहा थी, ”कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताएं होने वाली हैं. जल्द ही मैच अभ्यास शुरू करूंगी और अच्छा प्रदर्शन करना चाहती हूं और अपना सर्वश्रेष्ठ देना चाहती हूं. स्पेन में विश्व चैंपियनशिप भी है और मुझे अच्छा प्रदर्शन करने की उम्मीद है.” उन्होंने कहा, ”मैं निश्चित तौर पर 2024 पेरिस ओलंपिक में खेलूंगी, लेकिन इसमें काफी समय है. मैं अब इस लम्हें को सहेजकर रखने का प्रयास कर रही हूं.”

विश्व चैंपियनशिप स्पेन के हुएल्वा में दिसंबर में होगी
महामारी के कारण स्थगित की गई विश्व चैंपियनशिप का आयोजन स्पेन के हुएल्वा में 12 से 19 दिसंबर तक होना है. महामारी के बीच कई टूर्नामेंट रद्द होने के कारण सिंधू को अपने रक्षण पर काम करने का मौका मिला और उन्होंने इस दौरान स्मैश और नेट पर अपने कौशल को निखारा. सिंधू ने कहा था, ”मैंने पहले ही वादा किया था कि आपको कुछ नया कौशल और स्ट्रोक देखने को मिलेंगे. मुझे खुशी है कि मैं ओलंपिक में इसे दिखा पाई. मैं अपने कोच पार्क (तेइ-सांग) की आभारी हूं, हमने तकनीक पर कड़ी मेहनत की.”

ओलंपिक से पहले मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत रहना चुनौतीपूर्ण था
यह पूछने पर कि ओलंपिकस से पहले अनिश्चितता को देखते हुए क्या चीजें मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण थी, सिंधू ने कहा था, ”मुझे यकीन है कि ऐसा था क्योंकि महामारी से काफी लोग प्रभावित हुए और हमें लॉकडाउन का सामना करना पड़ा लेकिन मैंने इस समय का इस्तेमाल अपने कौशल और तकनीक पर काम करने के लिए किया.” सिंधू कहा था, फिटनेस बरकरार रखना और ओलंपिक से पहले मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत रहना चुनौतीपूर्ण था, जैविक रूप से सुरक्षित माहौल में रहते हुए हमें अपना ख्याल रखना था.

लगातार बड़े टूर्नामेंटों में पदक जीते थे
सिंधू ने लगातार बड़े टूर्नामेंटों में पदक जीते. उन्होंने 2018 में राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई खेलों में रजत पदक जीतने के बाद बीडब्ल्यूएफ विश्व टूर फाइनल्स में स्वर्ण और रजत पदक जीता. उन्होंने 2019 में खिताब से पहले विश्व चैंपियनशिप में दो रजत और दो कांस्य पदक भी जीते.

पिछले पांच साल शानदार रहे, काफी उतार-चढ़ाव आए
भारतीय खिलाड़ी ने कहा था, पिछले पांच साल शानदार रहे, यह शानदार सफर रहा. काफी उतार-चढ़ाव आए लेकिन मैंने काफी कुछ सीखा, काफी चीजों का अनुभव हासिल किया और काफी सुधार किया. उन्होंने कहा, 2016 ओलंपिक काफी अलग थे, वह मेरा पहला ओलंपिक था, कोई अपेक्षा नहीं थी. उस पदक ने मेरी जिंदगी बदल दी. इस बार काफी उम्मीदें थी और कांस्य पदक जीतना अलग अहसास है. सिंधू ने कहा था, ”तब ओलंपिक के लिए जाते हुए मैं सामान्य लड़की थी लेकिन इस बार सभी चाहते थे कि मैं जीतूं. इसलिए इस बार काफी अधिक दबाव था.”