बेंगलुरु. कर्नाटक चुनाव दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है. पहले बहुमत के करीब पहुंच बीजेपी 104 सीटों पर ही रुक गई और इसके बाद कांग्रेस ने जेडीएस को समर्थन देकर एक बड़ा सियासी दांव खेल दिया. कांग्रेस के पास जहां 78 सीटें हैं, वहीं जेडीएस के पास 38 और दो निर्दलीय विधायक भी उनके साथ हैं. ऐसी स्थिति में कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन के पास 118 विधायक हैं. लेकिन, सबसे बड़ी पार्टी होनी की वजह से गवर्नर ने बीजेपी को सरकार बनाने का न्यौता दिया और येदियुरप्पा ने गुरुवार की सुबह शपथ भी ले लिया. लेकिन सवाल ये उठता है कि क्या येदियुरप्पा की ये सरकार चल पाएगी? क्योंकि, कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है और कोर्ट ने 24 घंटे में समर्थक विधायकों के नाम मांग लिए हैं. Also Read - 'सेवा ही संगठन' कार्यक्रम में बोले पीएम मोदी- तारीफ के हकदार हैं बिहार के भाजपा कार्यकर्ता

तीसरी बार बने हैं सीएम Also Read - चीनी ऐप बैन के बाद पीएम मोदी का अगला कदम, ऐप बनाने के लिए युवाओं को दिया खास चैलेंज

बता दें कि येदियुरप्पा तीसरी बार कर्नाटक के सीएम बने हैं. साल 2007 में 7 दिन के लिए और फिर 2008 में 3 साल 2 महीने के लिए वह सीएम बने. लेकिन दोनों कार्यकाल उनका काफी विवादित रहा है. पहली बार 7 दिन में ही जेडीएस ने येदियुरप्पा से समर्थन वापस ले लिया था तो दूसरी बार भ्रष्टाचार के आरोप में उनकी कुर्सी चली गई थी. अब तीसरी बार वह कितने दिन के लिए सीएम बनते हैं यह देखने वाली बात होगी. Also Read - लद्दाख के निमू में पीएम मोदी ने की थी सिंधु दर्शन पूजा, सामने आया ये VIDEO

कांग्रेस कर चुकी है दावा

बता दें कि कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन गवर्नर वजुभाई से मिलकर सरकार बनाने का दावा कर चुकी है. गठबंधन का कहना है कि उनके पास बहुमत से ज्यादा विधायक हैं ऐसी स्थिति में उन्हें सरकार बनाना का आमंत्रण मिलना चाहिए. गवर्नर से माकूल जवाब मिलने के बाद कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 24 घंटे में येदियुरप्पा समर्थित विधायकों का नाम बताएं.

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है मामला

कांग्रेस इस मुद्दे पर काफी आक्रामक दिख रही है. पहले संविधान का हवाला देने के बाद वह सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है. उसने गवर्नर पर भी आरोप लगाया है. कांग्रेस महासचिव अशोक गहलोत और गुलाम नबी आजाद लगातार कर्नाटक में सक्रिय हैं. वे किसी भी स्थिति में कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन की सरकार बनाना चाहते हैं. गुरुवार की सुबह वे धरने पर भी बैठे.