नई दिल्ली: भाजपा ने मंगलवार को आरोप लगाया कि दसॉल्ट एविएशन के सीईओ एरिक ट्रैपियर के राफेल सौदे पर किये गये दावों ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के झूठ को उजागर कर दिया है. पार्टी ने यह भी कहा है कि भारत की सुरक्षा जरूरतों के प्रति राहुल का व्यवहार गैर-जिम्मेदाराना होता जा रहा है. Also Read - गुजरात को पीएम नरेंद्र मोदी की सौगात, इस दिन सी-प्लेन, जंगल सफारी व अन्य प्रोजेक्ट्स का करेंगे उद्घाटन

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केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि ट्रैपियर के साक्षात्कार ने कंपनी की ऑफसेट प्रतिबद्धताओं के बारे में फैल रहे झूठ को उजागर कर दिया है. उन्होंने कहा कि सीईओ ने साफ कर दिया है कि अनिल अंबानी की रिलायंस और 30 अन्य कंपनियों के साथ इस तरह की प्रतिबद्धता केवल दसॉल्ट की होगी और भारत सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं है. Also Read - पीएम कहते थे कि जो हवाई चप्पल पहनते हैं वे हवाई जहाज में चलेंगे, लेकिन कोरोना संकट के समय कहां चले गए थे: सोरेन

गांधी राफेल सौदे में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते आ रहे हैं और उन्होंने दावा किया है कि अंबानी को लाभ पहुंचाने के लिए हेराफेरी की गयी. सरकार और रिलायंस इन आरोपों को खारिज कर चुके हैं. प्रसाद ने कहा, ‘‘साक्षात्कार ने कांग्रेस और उसके अध्यक्ष के सारे झूठ का पर्दाफाश कर दिया है.’’

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उन्होंने कहा कि राफेल लड़ाकू विमान को भारतीय वायुसेना की सुरक्षा जरूरतों में सहयोग के लिए शामिल किया गया है. उन्होंने गांधी पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में उनका व्यवहार देश की सुरक्षा जरूरतों के हिसाब से गैर-जिम्मेदाराना और लापरवाही वाला होता जा रहा है. हैरानी की बात नहीं है कि राहुल गांधी और पाकिस्तान में उनके दोस्तों की भाषा एक जैसी है.’’

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भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने जबलपुर में संवाददाताओं से कहा कि राहुल गांधी का झूठ एक और बार पकड़ा गया है. उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘झूठ, कपट और षड्यंत्र की राहुल गांधी की राजनीति एक बार फिर सामने आ गयी है. वह इस हद तक बेशर्म हो गये हैं जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती.’’

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ट्रैपियर ने एक मीडिया इंटरव्यू में सौदे का बचाव करते हुए दावा किया था कि 58 हजार करोड़ रुपये के सौदे में कोई गड़बड़ी नहीं की गयी और यह साफ-सुथरा करार है. उन्होंने दावा किया कि उनकी कंपनी ने ऑफसेट साझेदार के रूप में रिलायंस को चुना. कांग्रेस ने ट्रैपियर के दावों को खारिज करते हुए उन्हें ‘सोचा-समझा झूठ’ करार दिया.