नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ लोकसभा में विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव ला रही है. भाजपा का तर्क है कि राहुल ने अविश्वास प्रस्ताव पर भाषण के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण पर झूठ बोलने का आरोप लगाया जो गलत है. वहीं, राहुल बार-बार राफेल डील पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि इससे उनकी अपनी पार्टी के ऊपर लगे बोफोर्स घोटाले की कालिख कम हो जाएगी.

कांग्रेस ने उतारी बड़े नेताओं की टीम
कांग्रेस का दावा है कि फ्रांस सरकार के साथ 2008 में हुई डील में गोपनीयता से संबंधित ऐसे कोई प्रावधान नहीं था, जिसकी वजह से सरकार राफेल की कीमतों का खुलासा नहीं कर सकती. लोकसभा में राहुल गांधी द्वारा यह बयान देने के बाद कांग्रेस ने भाजपा के प्रतिदावों का मुकाबला करने के लिए अपने तीन वरिष्ठ नेताओं की टीम उतार दी. पूर्व रक्षा मंत्री ए के एंटनी, आनंद शर्मा और रणदीप सुरजेवाला ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि अविश्वास प्रस्ताव पर भाषण के दौरान प्रधानमंत्री ने छद्म राष्ट्रीयता का लबादा ओढ़कर आरोपों से बचने की कोशिश की. 2008 में जब भारत और फ्रांस की सरकारों के बीच राफेल को लेकर डील की थी, तब एंटनी ही रक्षा मंत्री थे. उन्होंने कहा कि यह करार 2012 में रद्द कर दिया गया था. मोदी सरकार ने सीधे सरकारों के स्तर नया करार कर राफेल खरीदने का फैसला किया. इस तरह 2008 में हुए करार के सभी प्रावधान स्वतः खत्म हो गए. कांग्रेस नेताओं ने 2008 में हुए करार का दस्तावेज भी जारी किया. आनंद शर्मा ने कहा कि इस मामले में प्रधानमंत्री भी उतने ही दोषी हैं, क्योंकि उन्होंने लोकसभा में भाषण और रैलियों में भी इसको लेकर बार-बार झूठ बोला.

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भाजपा ने लगाया वंशवादी राजनीति का आरोप
कांग्रेस के हमले का जवाब देने के लिए भाजपा की ओर से कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने मोर्चा संभाला. उन्होंने दावा किया कि मौजूदा सरकार ने जो डील की है, उसमें हरेक विमान की बेस प्राइस 91.75 मिलियन यूरो है, जो यूपीए सरकार द्वारा किए गए करार से 9 फीसदी कम है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेता अध्यक्ष राहुल गांधी को बचाने के लिए एक के बाद एक बयान दे रहे हैं. उन्होंने यूपीए शासनकाल में संसद में मंत्रियों के बयानों की याद भी दिलाई जिसमें उन्होंने विमान की कीमतों का खुलासा करने से इंकार किया था.

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कांग्रेस की अपनी रणनीति
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए राफेल का मुद्दा बोफोर्स जैसा है. भाजपा सरकार के साढ़े चार साल के शासन में यह अकेला मुद्दा है जिस पर कांग्रेस बार-बार सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है. उन्हें उम्मीद है कि राफेल डील पर पूरे देश में माहौल बने तो एनडीए सरकार के लिए यह वही भूमिका निभा सकता है, जो 1989 में कांग्रेस के लिए बोफोर्स ने निभाई थी. बता दें कि 1989 में वी पी सिंह के नेतृत्व में विपक्षी गठबंधन ने बोफोर्स सौदे में दलाली का आरोप लगाकर कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर दिया था. हालांकि, बोफोर्स सौदे का दाग अब भी कांग्रेस के दामन से हटा नहीं है. राहुल को इसकी काट राफेल डील में दिख रही है.

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भाजपा को चुनाव की चिंता
दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा इस मामले में कांग्रेस को कोई छूट नहीं देना चाहती. उसे अंदेशा है कि राहुल एनडीए सरकार के भ्रष्टाचार मुक्त होने के दावे को झूठा साबित करना चाहते हैं. अब तक के कार्यकाल में भाजपा और उसके मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के आरोप नहीं लगे हैं. सरकार इसी बेदाग रिकॉर्ड के साथ चुनाव में उतरना चाहती है. यही कारण है कि कांग्रेस नेताओं की ओर से एक बयान आते ही भाजपा की ओर से प्रतिदावों की होड़ लग जाती है.