नई दिल्ली: केन्द्र ने वायु सेना के लिए 36 राफेल लडाकू विमान सौदे की कीमत का जो ब्योरा सील बंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को सौंपा हैं, न्यायालय बुधवार को उसकी जांच करेगा. सरकार ने सोमवार को ये दस्‍तावेज सुप्रीम कोर्ट को दिये. मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस के कौल एवं न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की पीठ इस मामले में अहम सुनवाई करेगी जिसमें याचिकाकर्ता भी दलीलें देंगे. याचिकाकर्ताओं ने सौदे की अदालत की निगरानी में जांच की मांग की है.

केन्द्र ने सोमवार को ‘‘36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने का आदेश देने के लिये निर्णय लेने की प्रक्रिया में उठाये गये कदमों का विवरण’’ शीर्षक वाला 14 पेज का दस्तावेज याचिकाकर्ताओं को सौंप दिया था. सरकार ने राफेल विमान की कीमतों का ब्योरा सीलबंद लिफाफे में न्यायालय को दे दिया है. याचिकाकर्ता दस्तावेजों में दर्ज बातों पर अपनी दलील दे सकते हैं.

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सोमवार को केंद्र द्वारा दस्‍तावेज सौंपने के बाद इस मुद्दे पर नये सिरे से बयानबाजी शुरू हो गई. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि दस्‍तावेजों से स्‍पष्‍ट है कि सरकार ने राफेल सौदे में प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया. थोड़ी देर बाद ही भाजपा ने पलटवार करते हुए कांग्रेस पर झूठ बोलने का आरोप लगाया और दावा किया कि सौदे में सभी प्रक्रियाओं का पालन किया गया है.

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इधर, मंगलवार को दसॉल्‍ट एविएशन के सीईओ ने एक इंटरव्‍यू में कहा कि ऑफसेट पार्टनर के चुनाव में भारत सरकार की कोई भूमिका नहीं थी. कांग्रेस पार्टी ने इस बयान को भी सोची-समझी झूठ करार दिया है. इसके जवाब में भाजपा ने कहा कि दसॉल्ट एविएशन के सीईओ एरिक ट्रैपियर के राफेल सौदे पर किये गये दावों ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के झूठ को उजागर कर दिया है. पार्टी ने यह भी कहा है कि भारत की सुरक्षा जरूरतों के प्रति राहुल का व्यवहार गैर-जिम्मेदाराना होता जा रहा है.

 

इनपुट: एजेंसी