नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय वायु सेना के लिए फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदे जाने के मामले की न्यायालय की निगरानी में जांच के लिए दायर याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है. प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की पीठ मामले की सुनवाई कर रही है. सुप्रीम कोर्ट ने दलीलें सुनने के बाद कहा कि इस पूरे मामले में भारतीय वायुसेना का पक्ष भी सुने जाने की जरूरत है. सीजेआई रंजन गोगोई ने एजी केके वेणुगोपाल से पूछा कि क्या कोर्ट में एयरफोर्स का भी कोई ऑफिसर मौजूद है, जो इससे जुड़े मामलों पर जवाब दे सके? क्योंकि हम सब एयरफोर्स से जुड़े मामले पर ही चर्चा कर रहे हैं, इस मुद्दे पर हम एयरफोर्स से भी कुछ सवाल पूछना चाहते हैं.Also Read - viral video: कांग्रेस विधायक पति के साथ थाने में धरने पर बैठी आईं नजर, बोलीं- सभी बच्‍चे पीते हैं

सुनवाई के दौरान एजी ने कहा कि यह मामला इतना गोपनीय है कि सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया गया सीलबंद लिफाफा मैंने भी नहीं देखा है. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राफेल की कीमत के बारे में याचिकाकर्ताओं को अभी कोई जानकारी न दी जाए. जब तक कि सुप्रीम कोर्ट इजाजत न दे, तब तक इस पर चर्चा भी नहीं होनी चाहिए. Also Read - UP Assembly Election 2022: प्रियंका गांधी का बड़ा ऐलान-यूपी विधानसभा चुनाव में 40% महिलाओं को टिकट देगी कांग्रेस

सुनवाई शुरू होते ही प्रशांत भूषण ने कहा कि एनडीए सरकार ने ये विमान खरीदने की प्रक्रिया के तहत निविदा आमंत्रित करने की प्रक्रिया से बचने के लिये अंतर-सरकार समझौते का रास्ता अपनाया. उन्होंने कहा कि इस सौदे के संबंध में फ्रांस सरकार की ओर से कोई शासकीय गारंटी नहीं है. उन्होंने कहा कि शुरू में केन्द्रीय कानून मंत्रालय ने इस मुद्दे पर आपत्ति की थी परंतु बाद में वह अंतर-सरकार समझौते के प्रस्ताव पर सहमत हो गया. प्रशांत भूषण अपनी और भाजपा के दो नेताओं एवं पूर्व मंत्रियों यशवंत सिन्हा और अरूण शौरी की ओर से बहस कर रहे थे. Also Read - UP: BJP समर्थित बागी सपा विधायक नितिन अग्रवाल बड़े अंतर से यूपी विधानसभा के उपाध्यक्ष चुने गए, CM योगी ने SP पर हमला किया

भूषण ने रक्षा खरीद प्रक्रिया का जिक्र करते हुये कहा कि भारतीय वायु सेना को 126 लड़ाकू विमानों की आवश्यकता थी और उसने इनके लिए रक्षा खरीद परिषद को सूचित किया था. शुरू में छह विदेशी कंपनियों ने आवेदन किया था परंतु शुरूआती प्रक्रिया के दौरान दो कंपनियों को ही अंतिम सूची में शामिल किया गया. उन्होंने कहा कि यह सौदा बाद में फ्रांस की दसाल्ट कंपनी को मिला और सरकार के स्वामित्व वाला हिन्दुस्तान ऐरोनाटिक्स लि. इसका हिस्सेदार था. परंतु अचानक ही एक बयान जारी हुआ जिसमें कहा गया कि तकनीक का कोई हस्तांतरण नहीं होगा और सिर्फ 36 विमान ही खरीदे जायेंगे.

भूषण ने कहा कि प्रधान मंत्री द्वारा इस सौदे में किये गये कथित बदलाव के बारे में कोई नहीं जानता. यहां तक कि रक्षा मंत्री को भी इसकी जानकारी नहीं थी. उन्होंने राफेल की कीमतों का खुलासा करने की मांग की इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जितना इस केस के लिए जरूरी है उतना ही बोलें. भूषण के दस्तावेज में गलती पकड़ते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जल्दबाजी में जानकारी न दें. इसके बाद भूषण ने भी माना कि उनसे जल्दबाजी में गलती हुई है. भूषण ने कहा कि कीमत के मामले में कोई भी गोपीय मुद्दा नहीं हो सकता, क्योंकि सरकार ने खुद संसद में इसके दाम बताए हैं. यह एक बेकार दलील है कि सरकार गोपनीयता के नाम पर कीमत की जानकारी नहीं दे सकती. भूषण का कहना था कि राफेल डील 40 प्रतिशत महंगी हुई है.