नई दिल्ली: राफेल सौदे को लेकर कांग्रेस आरपार की लड़ाई लगने के मूड में है. दसाल्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एरिक ट्रैपर द्वारा राफेल सौदे को ‘साफ-सुथरा’ कहे जाने के बाद कांग्रेस ने नरेंद्र मोदी सरकार पर नए सिरे से हमला बोला और आरोप लगाया कि सरकार इस ‘घोटाले’ पर पर्दा डालने की कोशिश कर रही है. पार्टी ने साथ ही कहा कि दसाल्ट सीईओ का दावा ‘गढ़ा हुआ झूठ’ है. पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी प्रधानमंत्री पर इस मामले को लेकर नए सिरे से हमला बोला. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वायुसेना से पूछे बिना राफेल का कांट्रैक्ट बदल दिया. वहीं केन्द्र ने वायु सेना के लिए 36 राफेल लडाकू विमान सौदे की कीमत का जो ब्योरा सील बंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को सौंपा हैं, न्यायालय आज उसकी जांच करेगा.

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वित्त मंत्री अरुण जेटली ने राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राजनीति में विफल हो गए हैं और इसी के चलते मजबूर होकर ‘झूठ पर झूठ’ बोले जा रहे हैं और संवेदनशील राफेल खरीद रक्षा सौदे को विवादास्पद बना रहे हैं. केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि ट्रैपियर के इंटरव्यू ने कंपनी की ऑफसेट प्रतिबद्धताओं के बारे में फैल रहे झूठ को उजागर कर दिया है. उन्होंने कहा कि सीईओ ने साफ कर दिया है कि अनिल अंबानी की रिलायंस और 30 अन्य कंपनियों के साथ इस तरह की प्रतिबद्धता केवल दसॉल्ट की होगी और भारत सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं है.

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कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ‘देश विमान सौदे में मनगढ़ंत स्पष्टीकरण नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच चाहता है. दरअसल, दसाल्ट के सीईओ एरिक ट्रैपर ने एक इंटरव्यू में कहा है कि 58 हजार करोड़ रुपये के इस विमान सौदे में कुछ गलत नहीं हुआ और यह ‘साफ-सुथरा सौदा’ है. ट्रैपर ने दावा किया कि उनकी कंपनी ने ‘ऑफसेट साझेदार’ के तौर पर खुद से रिलायंस का चुनाव किया. इस पर सुरजेवाला ने कहा, ‘पूर्वनियोजित इंटरव्यू और मनगढ़ंत झूठ से राफेल विमान को दबाया नहीं जा सकता. उन्होंने आरोप लगाया, ‘भाजपा सरकार और दसाल्ट के बीच फिक्स्ड मैच है. प्रधानमंत्री मोदी और एरिक ट्रैपर के पीआर स्टंट से भ्रष्टाचार को छिपाया नहीं जा सकता.’

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कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता आनंद शर्मा ने आरोप लगाया कि सरकर ने इस ‘घोटाले’ पर पर्दा डालने की कोशिश शुरू कर दी है. उन्होंने कहा, ‘एरिक ट्रैपर के इंटरव्यू के वक्त पर गौर करने की जरूरत है. यह उस समय आया है जब चुनाव नजदीक हैं. प्रधानमंत्री ने इस सौदे को खुद बदलवाया और 126 की बजाय 36 विमान खरीदने का फैसला किया…सरकार इस घोटाले को ढकने की कोशिश कर रही है.’ इससे पहले, गांधी ने ट्वीट कर कहा, ‘ सुप्रीम कोर्ट में मोदी जी ने मानी अपनी चोरी. हलफ़नामे में माना कि उन्होंने बिना वायुसेना से पूछे कांट्रैक्ट बदला और 30,000 करोड़ रूपया अंबानी की जेब में डाला. उन्होंने तंज कसते हुए कहा, ‘पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त….’

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दरअसल, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी पिछले कई महीनों से यह आरोप लगाते आ रहे हैं कि मोदी सरकार ने फ्रांस की कंपनी दसाल्ट से 36 राफेल लड़ाकू विमान की खरीद का जो सौदा किया है, उसका मूल्य पूर्ववर्ती यूपीए सरकार में विमानों की दर को लेकर बनी सहमति की तुलना में बहुत अधिक है. इससे सरकारी खजाने को हजारों करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है. पार्टी ने यह भी दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सौदे को बदलवाया और एचएएल से ठेका लेकर रिलायंस डिफेंस को दिया गया. सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है.

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माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी ने मोदी सरकार पर लड़ाकू विमान राफेल की खरीद में हुये कथित घोटाले को छुपाने के लिये झूठ के पुलिंदे का सहारा लेने का आरोप लगाया है. येचुरी ने मंगलवार को कहा कि फ्रांस से लेकर भारत तक राफेल सौदे की सांठगांठ में शामिल मोदी सरकार के सभी प्रकार के करीबी लोग इस करार के ऐसे तथ्यों का बचाव करने के लिये बाहर निकल आये हैं जो बचाव के योग्य नहीं हैं. येचुरी ने ट्वीट कर कहा ‘मोदी सरकार ने प्रत्येक विमान के लिये कीमत से 40 प्रतिशत अधिक राशि का भुगतान किया. इससे साफ है कि घोटाले में 59 हजार करोड़ रुपये का भ्रष्टाचार हुआ.’

येचुरी ने राफेल सौदे पर लग रहे भ्रष्टाचार के आरोपों के बचाव में उतरे फ्रांस की कंपनी दसाल्ट के सीईओ के बयान का हवाला देते हुये कहा कि सौदे पर उठे सवालों का जवाब नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक, उच्चतम न्यायालय और सीबीआई को देना चाहिये ना कि इस सौदे से मुनाफा कमाने वाली फ्रांसीसी कंपनी के सीईओ को. एक अन्य ट्वीट में उन्होंने इस मामले में सरकार की चुप्पी पर निशाना साधते हुये कहा ‘‘मोदी सरकार की तरफ से कोई जवाब नहीं मिल रहा है क्योंकि इस मामले में भ्रष्टाचार के तार शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व और उनके करीबियों से सीधे तौर पर जुड़े हैं.’

(इनपुट-भाषा)