नई दिल्‍ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को राफेल सौदे पर सरकार को क्लीन चिट देने के अपने निर्णय के खिलाफ दायर की गईं पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज कर दिया है. कोर्ट नेेकहा कि इनमे कोई दम नहीं है.

भारतीय वायुसेना के लिए फ्रांस से  58,000 करोड़ रुपए के लड़ाकू विमान खरीदने की डील पर शीर्ष कोर्ट ने अपना पहले का फैसला कायम रखा है. कोर्ट ने लड़ाकू विमानों के लिए फ्रांस की फर्म दसालट एविऐशन के साथ हुए समझौते में मोदी सरकार को क्लीन चिट देने का निर्णय दोहराया.

शीर्ष कोर्ट ने राफेल फाइटर जेट प्‍लेन डील मामले में नरेंद्र मोदी सरकार को गुरवार को क्लीन चिट देते हुए कहा कि पुनर्विचार याचिकाएं सुनवाई योग्य नहीं हैं. सुप्रीम कोट ने अपने 14 दिसंबर 2018 के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया.

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, जस्टिस संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति के एम जोसफ की पीठ ने कहा, हम इन पुनर्विचार याचिकाओं को बगैर किसी मेरिट का पाते हैं. न्यायमूर्ति कौल ने फैसला सुनाते हुए कहा कि न्यायाधीश इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि आरोपों की रोविंग जांच का आदेश देना उचित नहीं है.

पुनर्विचार याचिकाएं खारिज होने का तात्पर्य राफेल सौदे के संबंध में मोदी सरकार को दूसरी बार क्लीन चिट देना है. 14 दिसंबर के फैसले में कहा गया था कि 36 राफेल लड़ाकू विमानों को खरीदने में निर्णय निर्धारण की प्रक्रिया पर संदेह करने की कोई बात नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया कि इस सौदे के संबंध में प्राथमिकी दर्ज करने की आवश्यकता है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमें नहीं लगता कि राफेल विमान सौदा मामले में प्राथमिकी दर्ज करने या बेवजह जांच का आदेश देने की जरूरत है.

 

सीजेआई रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति के. एम. जोसफ की पीठ ने राजनीतिक रूप से संवेदनशील इस मामले पर 10 मई को सुनवाई पूरी की थी. पीठ ने कहा था कि इस पर फैसला बाद में सुनाया जाएगा.

बता दें कि 14 दिसंबर 2018 को शीर्ष अदालत ने 58,000 करोड़ रुपए के इस समझौते में कथित अनियमितताओं के खिलाफ जांच का मांग कर रही याचिकाओं को खारिज कर दिया था.

बता दें कि शीर्ष अदालत में राफेल मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और वकील प्रशांत भूषण समेत कुछ अन्य ने याचिकाएं दायर की थी. इन याचि‍काओं में सुप्रीम कोर्ट के पिछले साल के 14 दिसंबर के उस फैसले पर पुनर्विचार की मांग की गई थी, जिसमें फ्रांस की कंपनी ‘दसॉल्ट’ से 36 लड़ाकू विमान खरीदने के केंद्र के राफेल सौदे को क्लीन चिट दी गई थी. (इनपुट: एजेंसी)