नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को कहा कि सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को अनिश्चितकालीन छुट्टी पर जाने के लिए बाध्य करना ‘‘अवैध’’ है. इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि सरकार इस बात से डर गयी थी कि वह राफेल विमान सौदे की जांच कर सकते हैं.

राहुल ने एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए दावा किया कि वर्मा को हटाना संविधान, देश के प्रधान न्यायाधीश और नेता प्रतिपक्ष का ‘‘अपमान’’ है. उन्होंने कहा कि यह कदम ‘अवैध’ है. राहुल ने कहा कि सीबीआई के डायरेक्टर की नियुक्ति और पद से हटाने का फैसला एक कमेटी लेती है. इसमें प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस और लोकसभा में विपक्ष के नेता शामिल होते हैं. लेकिन मोदी सरकार ने आलोक वर्मा को हटाने का फैसला रात के दो बजे किया.

राहुल ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री डरे हुए हैं. उन्हें अंदेशा है कि उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले सार्वजनिक हो जाएंगे.

राहुल ने आगे कहा कि आलोक वर्मा को केवल हटाया नहीं गया, बल्कि उनके कमरे को सील कर दिया गया. उनके पास जो दस्तावेज थे, वे वापस ले लिये गए. यह सबूतों को छिपाने की कोशिश है.

कांग्रेस अध्यक्ष ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री की चुप्पी पर भी सवाल उठाये. उन्होंने कहा कि मैं आपके सामने आता हूं और आप अपनी मर्जी से सवाल पूछते हैं, लेकिन आप प्रधानमंत्री से राफेल के बारे में सवाल पूछ कर देखो, तो वह उठकर भाग जाएंगे.

राहुल ने यह आरोप भी लगाया कि एजेंसी का अंतरिम प्रभार ऐसे व्यक्ति को दिया गया है जिनके खिलाफ ही मामले हैं ताकि प्रधानमंत्री उन्हें नियंत्रित कर सकें.

वित्त मंत्री अरूण जेटली ने बुधवार को कहा था कि वर्मा तथा विशेष निदेशक राकेश अस्थाना को केंद्रीय सतर्कता आयोग की सिफारिश पर छुट्टी पर भेजा गया. उन्होंने कहा था कि सीबीआई की संस्थागत ईमानदारी और विश्वसनीयता को कायम रखने के लिए यह अत्यंत आवश्यक था. सरकार ने यह भी कहा है कि आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना अब भी सीबीआई में अपने पदों पर बने हुए हैं, केवल उनके अधिकार लिए गए हैं.