नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इस बात पर अड़े हुए हैं कि वह अपना इस्तीफा वापस नहीं लेंगे. इसके साथ ही वह पार्टी के पुराने नेता अशोक गहलोत, कमलनाथ और पी. चिदंबरम से काफी खफा हैं, जिन्होंने हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में अपने बेटों को जीत दिलाने का प्रयास किया और पार्टी के लिए काम नहीं करते दिखे.

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हालांकि अब यह माना जा रहा है कि राहुल ने यह स्वीकार कर लिया है कि वह लोकसभा में कांग्रेस पार्टी का नेतृत्व करेंगे, जहां पार्टी ने इस बार 52 सीटें जीती हैं, जोकि पिछली बार की सीटों की तुलना में केवल आठ ज्यादा है. सोनिया गांधी संप्रग की अध्यक्ष बनी रहेंगी और परिवार खुद को पार्टी के रोजाना की गतिविधियों से दूर रहेगा. गांधी परिवार के तीनों सदस्य -सोनिया, राहुल और प्रियंका- पार्टी की रोजाना की गतिविधियों में शामिल नहीं होंगे. एक अंतरिम कार्यकारी अध्यक्ष और दो या इससे ज्यादा उपाध्यक्ष एक अध्यक्ष-मंडल का निर्माण करेंगे, जो पार्टी का संचालन करेगा और चुनाव व प्रचार की योजना बनाएगा.

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के.सी. वेणुगोपाल अंतरिम अध्यक्ष
के.सी. वेणुगोपाल अंतरिम अध्यक्ष के तौर पर, जबकि पृथ्वीराज चौहान उपाध्यक्षों में से एक के तौर पर उभर सकते हैं. यह देखते हुए कि दक्षिण से इस बार 23 सांसद चुन कर आए हैं, ऐसा प्रतीत होता है कि दक्षिण भारत इस समय कांग्रेस के लिए सहारा बना हुआ है. विकल्प के तौर पर ज्योतिरादित्य सिंधिया को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जा सकता है और वह अन्य युवाओं को साथ लेकर पार्टी का भाग्य बदलने का काम करें.

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16 राज्यों, दो केंद्रशासित प्रदेशों में अपना खाता तक नहीं खोल सकी कांग्रेस
हालिया चुनाव में कांग्रेस 16 राज्यों, दो केंद्रशासित प्रदेशों में अपना खाता तक नहीं खोल सकी. यहां तक की आठ मुख्यमंत्री और लोकसभा में पार्टी के नेता भी अपना चुनाव हार गए. कांग्रेस ने पूरे देश में 421 उम्मीदवारों को उतारा था, लेकिन इसमें से केवल 52 ही जीत सके. यह लगातार दूसरी बार है, जब पार्टी ने इतना खराब प्रदर्शन किया है. कांग्रेस ने सबसे अधिक 15 सीटें केरल में और पंजाब व तमिलनाडु में आठ-आठ सीटें जीती हैं. चुनाव में हारने वाले नेताओं में कांग्रेस कार्यकारिणी में शामिल चार नेता भी हैं, जोकि पार्टी की शीर्ष निर्णय लेने वाली इकाई है. (इनपुट एजेंसी)

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