नई दिल्‍ली: जम्‍मू-कश्‍मीर के राज्‍यपाल सत्‍यपाल मलिक ने बुधवार को धारा 370 हटाए जाने के बाद पहली बार संवाददाता सम्‍मेलन किया. मीडियाकर्मियों ने जब उनसे कश्‍मीर पर राहुल गांधी की भूमिका पर सवाल किया तो राज्‍यपाल मलिक ने बेहद तीखी प्रतिक्र‍िया दे डाली. उन्‍होंने अपने जवाब में कांग्रेस के पूर्व अध्‍यक्ष राहुल गांधी को कहा कि उन्‍होंने कश्‍मीर पर राजनीतिक नाबालिग की तरह व्‍यवहार किया है. मलिक ने तो यहां तक कह दिया कि उनका विरोधी सिर्फ उन्‍हें धारा 370 का हिमायती होने वाला बता देगा तो लोग राहुल गांधी को जूते मारेंगे.

राहुल गांधी के लिए मैं इसलिए नहीं बोलना चाहता हूं चूंकि वो देश के एक प्रतिष्‍ठ‍ित परिवार का लड़का है, लेकिन उसने पोलिटिकल जुवेनिल की तरह बिहैव किया और उसी का नतीजा है कि आज यूएन में पाकिस्‍तान की चिट्ठी में उसके बयानात दर्ज हैं. ऐसा नहीं करना चाहिए था. उसको बोलना उस दिन था जब पार्लियामेंट के फ्लोर पे उसकी पार्टी का लीडर कश्‍मीर के सवाल को यूएन से जोड़कर कह रहा था. वो अगर लीडर था तो उसका बिठाता, डांटता.. और फिर खुद खड़ा होकर कहता कि हमारा कश्‍मीर पर ये स्‍टैंड है. आज तक उन्‍होंने स्‍टैंड क्‍लीयर नहीं किया. अब मैं बता रहा हूं.. मुझे नहीं बताना नहीं चाहिए ये जिस वक्‍त देश में चुनाव आएगा, उनके विरोधी को कुछ कहने की जरूरत नहीं है. वो सिर्फ इतना कह देगा कि ये 370 के हिमायती हैं. लोग जूतों से मारेंगे.

राज्‍यपाल केंद्र द्वारा 5 अगस्त को संविधान के आर्टिकल 370 के तहत जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे को समाप्त करने की घोषणा किए जाने के बाद राज्यपाल पहली बार संवाददाता सम्मेलन कर रहे थे.

जो जेल जाते हैं, वे नेता बनते हैं
जम्मू-कश्मीर से संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को हटाने के बाद मुख्यधारा के सियासतदानों को हिरासत में रखने को राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने यह कहते हुए न्यायोचित ठहराने की कोशिश की कि जितना ज्यादा वक्त वे जेल में रहेंगे, उन्हें उतना ही राजनीतिक फायदा मिलेगा. बता दें सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती को नजरबंद किया हुआ है.

क्या आप नहीं चाहते हैं लोग नेता बनें. मैं 30 बार जेल गया हूं
राज्यपाल ने कहा, ” क्या आप नहीं चाहते हैं लोग नेता बनें. मैं 30 बार जेल गया हूं. जो लोग जेल जाते हैं, वे नेता बनते हैं. उन्हें वहां रहने दें. जितना ज्यादा वक्त वे जेल में बिताएंगे, चुनाव प्रचार के समय उतना ही वे दावे कर पाएंगे. मैंने छह महीने जेल में गुज़ारे हैं.

फारूक अब्दुल्ला अपने घर में हैं, उनके बेटे उमर हरि निवास में हैं
मलिक ने कहा, इसलिए अगर आपको उनसे हमदर्दी है, तो उन्हें हिरासत में लेने से दुखी नहीं हों. वे सभी अपने घरों में हैं. मैं आपातकाल के दौरान फतेहगढ़ जेल में था, जहां पहुंचने में दो दिन लगते थे. अगर किसी मुद्दे पर किसी को हिरासत में लिया जाता है और उसकी मर्जी है, तो वह राजनीतिक लाभ लेगा. फारूक अब्दुल्ला अपने घर में हैं, जबकि उनके बेटे उमर हरि निवास में हैं. वहीं महबूबा मुफ्ती को चश्मेशाही में रखा गया है. (इनपुट: एजेंसी)