नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार की जिम्मेदारी लेते हुए राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष का पद छोड़ने की पेशकश की थी. शुरू में तो उनकी पार्टी के साथ-साथ अन्य दलों के नेताओं को भी लगा था कि हर बार की तरह इस बार भी राहुल गांधी को ‘मना’ लिया जाएगा, लेकिन राहुल नहीं माने. आखिरकार सियासी गलियारों में अब कांग्रेस के नए अध्यक्ष पद पर काबिज होने वाले नेता का नाम सुर्खियों में आने लगा है. मीडिया की कुछेक रिपोर्टों में एक हफ्ते पहले से ही राहुल गांधी की जगह राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का नाम नए पार्टी अध्यक्ष के रूप में चल रहा है. अगर ये खबरें सही साबित होती हैं तो देश की सबसे पुरानी पार्टी में पिछले दो दशकों से ज्यादा समय से चला आ रहा ‘गांधी-परिवार’ का युग समाप्त हो जाएगा. इसकी जगह गहलोत पार्टी के नए मुखिया होंगे.

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अशोक गहलोत के पिता जादूगर थे. वहीं गहलोत की चर्चा इस बात के लिए भी की जाती है कि वर्षों पहले वे खुद राहुल गांधी को जादू दिखलाया करते थे. कांग्रेस में इसी कारण उन्हें ‘जादूगर चाचा’ भी कहा जाता रहा है. राहुल गांधी के निर्णय से एक और बात साबित होगी कि देश की सबसे पुरानी पार्टी अब किसी ‘गांधी’ के भरोसे नहीं रहेगी, बल्कि उसकी कमान एक ‘जादूगर’ के हाथ में सौंपी जा रही है. इस ‘जादूगर’ के ऊपर यह जिम्मेदारी होगी कि वह पार्टी को नया वर्तमान तो दे ही, उसका स्वर्णिम अतीत भी लौटा दे. हमारी सहयोगी वेबसाइट डीएनए की रिपोर्ट के मुताबिक राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद छोड़ने को लेकर अपनी राय स्पष्ट कर दी है. उन्होंने साफ कहा है कि पार्टी के शीर्ष पद पर अब किसी और नेता को लाया जाए. इसके मद्देनजर नए अध्यक्ष की चर्चा हो रही है. डीएनए की रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस की दिल्ली इकाई का एक बड़ा धड़ा अशोक गहलोत को अध्यक्ष बनाने पर एकमत है. वहीं गांधी-परिवार भी गहलोत के नाम पर ही सहमत दिख रहा है.

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सचिन पायलट सीएम बनेंगे या नहीं, सस्पेंस कायम
कुछ मीडिया रिपोर्ट में बीते दिनों ऐसे कयास भी लगाए गए थे कि कांग्रेस, अशोक गहलोत को पार्टी का अध्यक्ष बनाने के साथ ही उनसे राजस्थान का मुख्यमंत्री पद लेना चाहती है. पार्टी की मंशा है कि अशोक गहलोत के कांग्रेस अध्यक्ष बन जाने के बाद डिप्टी सीएम सचिन पायलट को राजस्थान की कमान सौंप दी जाए. लेकिन डीएनए की रिपोर्ट के अनुसार, बताया जा रहा है कि अभी इस मुद्दे पर कोई राय नहीं बन पाई है. अलबत्ता इस बात की चर्चा ज्यादा है कि अशोक गहलोत कांग्रेस अध्यक्ष रहने के साथ-साथ मुख्यमंत्री भी बने रहें. इसके पीछे ममता बनर्जी और नवीन पटनायक जैसे मुख्यमंत्रियों का हवाला दिया जा रहा है, जो अपनी पार्टियों के अध्यक्ष रहते हुए भी मुख्यमंत्री पद पर हैं.

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अय्यर के बयान से पुख्ता हो रहीं खबरें
कांग्रेस के दिग्गज नेता और अपने बयानों से चर्चा में रहने वाले मणिशंकर अय्यर ने भी राहुल गांधी के अध्यक्ष पद छोड़ने और किसी गांधी-परिवार से इतर किसी नेता के पार्टी का नया अध्यक्ष बनने संबंधी बयान दिया है. हालांकि अय्यर ने कांग्रेस के लिए गांधी-परिवार की महत्ता को सर्वोच्च बताते हुए यह भी कहा है कि ‘गैर-गांधी’ पार्टी का अध्यक्ष हो सकता है, लेकिन गांधी परिवार के सदस्यों को संगठन के भीतर सक्रिय रहना पड़ेगा. अय्यर ने रविवार को दिए अपने बयान में कहा, ‘मैं आश्वस्त हूं कि पार्टी का अध्यक्ष कोई नेहरू-गांधी न हो तब भी हमारा अस्तित्व कायम रहेगा, बशर्ते नेहरू-गांधी परिवार पार्टी में सक्रिय रहे और ऐसे संकट का समाधान निकालने में मदद करे जहां गंभीर मतभेद उत्पन्न हों.’