नई दिल्ली: कांग्रेस ने मजदूरों को लेकर डॉक्यूमेंट्री जारी की है. इसमें वह हिस्सा है, जब राहुल गांधी ने पैदल चल रहे मजदूरों से मुलाक़ात की थी. राहुल गांधी मजदूरों से बात कर रहे हैं. सड़क किनारे बैठकर मजदूरों से राहुल गांधी ने कई सवाल जवाब किये कि वह किस तरह से हालात से निपट रहे हैं. उन्हें अब तक सरकार से कितनी मदद मिली है.Also Read - World News: इस देश ने जारी किया सख्त कानून-कोरोना वैक्सीन नहीं ली, स्टेडियम-रेस्टोरेंट में नहीं मिलेगी एंट्री

राहुल गांधी पूछते हैं कि दो चार महीने बाद क्या करेंगे, क्या शहर वापस जाएंगे, इस पर महिला रोते हुए कहती है कि हम मरते मर जाएंगे, लेकिन अब शहर नहीं आयेंगे. शख्स कहता है कि हमें कोरोना वायरस का डर नहीं सता रहा, जितना उससे पहले ही बुरे हालात से मर जाएंगे. हम अभी किसी किसी तरह घर पहुंच जाएंगे, फिर नहीं आयेंगे. हमें सरकार से अब तक कोई मदद नहीं मिली है. सरकार को महिला और मजदूर किसी की फिक्र नहीं है. चाहे जब कोई भी फैसला सुना दिया जाता है, गरीबों के बारे में सोचा भी नहीं जाता है. Also Read - UP Election 2022: आगरा में 6 उम्मीदवारों ने चुनाव के लिये नामांकन किया, एक ट्रांसजेंडर भी मैदान में

मजदूर बताते हैं कि बच्चों की वजह से हर दो तीन किलोमीटर में बैठना पड़ता है. बड़े लोगों के लिए सब आसानी है, हम गरीबों का कोई नहीं. हम दुखी हैं. किराया माफ़ नहीं हुआ. न बिजली बिल का माफ़ हुआ. कहा सब गया था. राहुल गांधी से महिलाएं कहती हैं कि हमें झाँसी पहुंचा दो बहुत मेहरबानी होगी. इस पर राहुल गांधी मदद का आश्वासन देते हैं. बता दें कि इन लोगों को राहुल गांधी ने कारों से झाँसी में उनके घरों तक भिजवाया था. Also Read - Zee Opinion Poll: उत्तराखंड में कांग्रेस की सरकार बनती है तो क्या आप बनेंगे मुख्यमंत्री? जानें हरीश रावत का जवाब...

राहुल गांधी ने गत 16 मई को दिल्ली के सुखदेव विहार फ्लाईओवर के पास इन प्रवासी मजदूरों से मुलाकात की थी. उन्होंने फुटपाथ पर मजदूरों के साथ बैठकर बात की थी. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने उत्तर प्रदेश के झांसी के रहने वाले इन मजदूरों का दुख दर्द साझा किया था. ये मजदूर हरियाणा के अंबाला से पैदल चलकर अपने गांव जा रहे थे.

इसके साथ ही राहुल गांधी ने कोरोना वायरस महामारी में मुश्किल का सामना कर रहे करोड़ों परिवारों के लिए न्याय की मांग करते हुए प्रत्येक को 7500 रुपये देने की पैरवी की है. कांग्रेस और राहुल गांधी के विभिन्न सोशल मीडिया मंच पर इस डॉक्यूमेंट्री को जारी किया गया. गांधी की आवाज में इस डॉक्यूमेंट्री में मजदूरों की मुश्किलों को बयां किया गया है. उन्होंने करीब 17 मिनट की इस डॉक्यूमेंट्री में लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मजदूरों के दर्द को दिखाया है.

गौरतलब है कि लॉकडाउन के कारण ट्रेन और बसों के बंद होने के बाद प्रवासी मजदूर पैदल ही अपने-अपने घरों को निकल पड़े थे. विभिन्न जगहों पर हुए हादसों में कई मजदूरों की मौत भी हो गई. इस डॉक्यूमेंट्री में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि गरीबों और मजदूरों को न्याय दिया जाए और देश के आर्थिक रूप से कमजोर 13 करोड़ परिवारों में से प्रत्येक को 7500 रुपये की मदद दी जाए.

राहुल गांधी की मजदूरों से मुलाक़ात को निर्मला सीतारमण ने नौटंकी बताया था. उन्होंने कहा था कि राहुल गांधी ने पैदल चल रहे मजदूरों का समय खराब किया. उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था.