यात्रियों को ट्रैन के लम्बे सफर में मिलने वाले चादर के पीछे का एक ऐसा राज़ सामने आया है जिसे जानने के बाद आप शयद ही ट्रैन में चादर इस्तेमाल करेंगे। आपको बता दें की ट्रेनों में मिलने वाली चादरों, तकियों और कंबलों से दुर्गंध आने की अक्सर बाते सुनने मिलती है। आपको बता दें की इस बात की शिकायत के बीच शुक्रवार को रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने कहा कि उन कंबलों की धुलाई दो महीने में एक बार की जाती है।Also Read - Platform Ticket Price Reduce in Mumbai: मुंबई में लोगों को बड़ी राहत, Railway ने प्लेटफॉर्म टिकट की बढ़ी कीमतें वापस लीं

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रेलवे मिलने वाले कंबल की जानकारी खुद रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने दिया है। यह बात तब कही उन्होंने जब राज्यसभा में प्रश्न काल का दौर चल रहा था। मनोज सिन्हा ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान विभिन्न सदस्यों के पूरक सवालों के जवाब में कहा कि चादरों, तकियों के खोलों को हर दिन साफ किया जाता है जबकि कंबलों को दो महीनों में एक बार धोया जाता है। यह भी पढ़ें: एप जिससे मिलेगा आपको कंफर्म रेल टिकट Also Read - रेलवे ट्रैक के पास खड़े होकर चलती ट्रेन के करीब से अपना वीडियो शूट करवाना पड़ा भारी, चली गई जान

सिन्हा ने इस सवाल को अच्छा बताया और कहा की यात्रियों से बेडरॉल की हालत के संबंध में समय-समय पर पत्र प्राप्त होते रहते हैं। पत्र मिलने पर उचित कार्रवाई की जाती है। वहीं राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी का कहना था की पहले जब लोग अपना चादर लाया करते थे, उस पुरानी व्यवस्था को अच्छा बताया। इस बात के समर्थन में कांग्रेस के एक सांसद ने समर्थन देते हुए बाकि मंत्रियो की राय मांगी।

रेल ने इन सभी चीजो के सफाई के लिए अपने नियंत्रण में मशीनीकृत लांड्रियां स्थापित करने का निश्चिय किया था। आपको बता दें की उसके तहत अब तक रेल की 41 ऐसी लांड्रियां स्थापित कर दी गयी हैं। यह भी कहा जा है की अगले दो साल में 25 और ऐसी लांड्रियां चालू करने की योजना है। इसके शुरू होने के बाद लगभग 85 प्रतिशत यात्रियों की जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा।