नई दिल्ली. ट्रेनों में खराब खाना, गंदे टॉयलेट और अन्य असुविधाओं से यात्रियों को आए दिन दो-चार होना पड़ता है. यात्री इन समस्याओं की शिकायत भी करते हैं, लेकिन कई बार कोई सुनवाई नहीं होती है. कई बार तो प्रीमियम ट्रेनों में भी यात्रियों को ऐसी असुविधाओं का सामना करना पड़ता है. हाल ही में नई दिल्ली से वाराणसी के बीच चलने वाली सेमी-हाईस्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस में भी खराब खाना परोसने की शिकायत आई थी. इस ट्रेन के यात्रियों की शिकायत मिलने के बाद आखिरकार रेलवे बोर्ड सतर्क हुआ है. बोर्ड ने अब यात्रियों से सीधे फीडबैक लेने की योजना बनाई है. इसकी जिम्मेदारी रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी जाएगी.

रेल यात्रियों से प्रत्यक्ष जानकारी हासिल करने के मद्देनजर, रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विनोद कुमार यादव ने सभी महाप्रबंधकों और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को लगातार रेल से सफर करने को कहा है. सभी महाप्रबंधकों को 13 जून को लिखे पत्र में यादव ने उन्हें रेलवे द्वारा मुहैया कराई जाने वाली सुविधा के बारे में रपट दाखिल करने के लिए कहा. उन्होंने यह आदेश भारत की पहली सेमी हाई-स्पीड ट्रेन वंदे मातरम में खाने की खराब गुणवत्ता की शिकायत के बाद दिया.

अपने पत्र में यादव ने कहा, “रेल से यात्रा करना हमारी सेवा को लेकर वास्तविक स्थिति के बारे में पता करने का अवसर है.” उन्होंने कहा, “यह अकेला हमें हमारे यात्रियों और ग्राहकों के साथ ‘सत्यता के क्षण’ मुहैया करा सकता है और हमें हमारी सेवा को लगातार बेहतर करने के लिए अमूल्य जानकारी दे सकता है.”

आधिकारिक दौरों में ट्रेन से यात्रा करने के अलावा, महाप्रबंधकों, विभागीय रेल प्रबंधकों और यूनिट प्रमुखों को कोचों की स्थिति का निरीक्षण करने और यात्रियों से संवाद करने के लिए कहा गया है. रेलवे को खाने की खराब गुणवत्ता और बायो-टॉयलेट के जाम होने की वजह से आलोचना झेलनी पड़ रही है. आपको बता दें कि बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल की ट्रेनों में यात्री सुविधाओं को लेकर अक्सर शिकायतें आती रहती हैं.

(इनपुट – एजेंसी)