नई दिल्ली: रेलवे अब अपनी खाली पड़ी जमीनों और दत के खुले स्‍थान का व्‍यावसायिक इस्‍तेमाल कर सकेगा. सरकार ने रेलवे को उसके स्टेशनों के आसपास की भूमि और भवनों की छत के खुले स्थानों को वाणिज्यिक रूप से विकसित करने का रास्‍ता साफ कर दिया. इसके लिये रेलवे की स्टेशन पुनर्विकास योजना को मंजूरी दे दी गई है.

इसके साथ ही रेलवे अब इन स्थानों को वाणिज्यिक उपयोग के लिये दीर्घकालिक पट्टे पर दे सकेगी. पहले इसके लिये 45 साल की अवधि की मंजूरी थी जबकि अब इन्हें 99 साल के लिये वाणिज्यक इस्तेमाल के लिये दिया जा सकेगा.

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केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद जारी एक वक्तव्य में कहा गया है, ‘‘रेलवे स्टेशनों के विकास के लिये ‘दि इंडियन रेलवे स्टेशंस डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (आईआरएसडीसी) मुख्य एजेंसी होगी. यह कंपनी रेलवे स्टेशनों के अंदर और आसपास की जमीन और छत की खुली जगह को वाणिज्यिक रूप से विकसित कर रेलवे को लाभ पहुंचायेगी.’’

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स्टेशनों के पुनर्विकास परियोजना का यह कार्य 600 स्टेशनों में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का होने का अनुमान है. आईआरएसडीसी अलग स्टेशन अथवा स्टेशनों के समूह के लिये एक सकल रणनीतिक योजना और व्यावसायिक योजना तैयार करेगी. इससे इस कार्यक्रम को अधिक लागत प्रभावी बनाया जा सकेगा. इस व्यावसायिक योजना को रेल मंत्रालय की मंजूरी मिलने के बाद आईआरएसडीसी अथवा अन्य परियोजना विकास एजेंसियां स्टेशन पुनर्विकास का कार्य शुरू कर देंगे.