नई दिल्लीः अपनी विभिन्न मांगों को लेकर रेल कर्मचारी मंगलवार को संसद का घेराव करेंगे. नई पेंशन नीति, न्यूनतम मजदूरी और रेलवे के निजीकरण के खिलाफ रेलकर्मी केंद्र सरकार के खिलाफ संसद का घेराव करने वाले हैं. ऑल इंडिया रेलवे फेडरेशन ने सोमवार को इसकी जानकारी दी. प्रेस कॉन्फ्रेंस में जनरल सेक्रेटरी शिव गोपाल मिश्रा ने कहा कि लंबी लड़ाई के बाद रिटायर्ड होने वाले सरकारी कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा हासिल की गई थी, लेकिन 2004 में एनपीएस लागू होने के बाद इसका लाभ नहीं मिल रहा है. Also Read - नासिर हुसैन ने जो डेन्ली को दी सलाह: बड़ा स्कोर बनाना हो तो कोहली से सीख लें

गौरतलब है कि 2004 में तत्कालीन एनडीए सरकार ने नई पेंशन नीति लागू की थी. रेलकर्मियों का आरोप है कि नई नीति लागू होने के बाद से एक ही संस्थान में एक ही पद पर नौकरी कर रहे लोगों के साथ भेदभाव हुआ है. फेडरेशन का कहना है कि जनवरी 2004 के बाद से पांच लाख लोगों ने रेलवे में नौकरी जॉइन की है और उन्हें पेंशन का लाभ नहीं मिलेगा. Also Read - Sarkari Naukri: राजस्थान सरकार ने दो महाविद्यालयों, न्यायालय में इतने नए पदों को दी मंजूरी, पढ़िए पूरी डिटेल 

विरोध की वजह
इसी तरह केंद्र सरकार रेलवे को निजीकरण की ओर ले जा रही है. रेलकर्मी सरकार के इस कदम का विरोध कर रहे हैं. संसद घेराव के बारे में रेलवे कर्मचारियों का कहना है कि फिलहाल उनका मकसद रेल सेवा को प्रभावित करना नहीं है. Also Read - विकास दुबे को क्यों मारना पड़ा, कैसे पलटी कार, यूपी STF ने कहा- गाय भैंस सामने आईं, फिर...

दिलासा के अलावा कुछ नहीं मिला
केंद्रीय कर्मचारी एनपीएस को खत्म करने की मांग कर रहे हैं. पिछले साल उनकी कई मांगों में से प्रमुख मांग एनपीएस को खत्म करना था. केंद्र सरकार ने केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ की अध्यक्षता में एक कमिटी बनाई थी लेकिन इस मामले में कोई तरक्की नहीं हुई. शिव गोपाल मिश्रा ने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्से से 40 से 50 हजार रेलवे कर्मचारियों के इस मार्च में शामिल होने की उम्मीद है.

उन्होंने कहा कि एनपीएस की मांग को लेकर न केवल कर्मचारियों बल्कि ब्यूरोक्रेट्स में भी गुस्सा और पीड़ा है. हमारी मांगो को लेकर बार-बार हमें भरोसा दिया गया लेकिन कुछ नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि अगर इस बार भी हमारी मांग को अनसुना किया गया तो हम पूरे देश में बड़ा आंदोलन करेंगे.

ट्रेनों पर नहीं पड़ेगा प्रभाव
शिव गोपाल मिश्रा ने कहा कि इस मार्च की वजह से न तो किसी ट्रेन को रोका जाएगा और न ही किसी ट्रेन के संचालन में देरी होगी. उन्होंने दावा किया कि देश के सभी राज्यों के रेल फेडेरेशन इस मार्च में शामिल होंगे.उन्होंने यह भी कहा कि 18 हजार न्यूनतम सैलरी को लेकर भी कर्मचारी नाराज हैं उनकी मांग है कि न्यूनतम सैलरी को बढ़ाकर 26 हजार किया जाए.