नई दिल्ली. आप रेल सफर पर निकले हों और अगर आपकी ट्रेन लेट है तो निश्चिंत हो जाइए. क्योंकि ट्रेनों को समय पर चलते हुए देखने में अभी कम से कम और दो साल लगने हैं. जी हां, देश को तेज रफ्तार बुलेट ट्रेन का सपना दिखाने वाली केंद्र सरकार के रेल मंत्री पीयूष गोयल का कहना है कि वर्ष 2020 तक ट्रेनों की रफ्तार और समय पालन पूर्णतया ठीक हो पाएगा. यानी अगले दो साल तक ट्रेनों की लेट-लतीफी को लेकर कोई सुधार नहीं होने वाला है. क्योंकि बकौल रेल मंत्री, पटरियों की मरम्मत और रखरखाव के काम की वजह और गुड्स ट्रेनों के चलने के लिए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बन जाने के बाद ही ट्रेनें अपने समय पर चल पाएंगी. Also Read - नहीं जाएगी रेलवे कर्मचारियों की नौकरी, लेकिन काम बदल सकता है: भारतीय रेल

हर बार करते हैं समय पालन की बात, ट्रेनें फिर भी लेट

रेल मंत्री ट्रेनों को समय पर चलाने की बात करते हैं, लेकिन उनके दावे के उलट ट्रेनें और लेट होती जाती हैं. आज इस खबर के लिखे जाने के समय ही सेंट्रल रेलवे का एक ट्वीट आया कि 12188 सीएसएमटी-जबलपुर गरीब रथ एक्सप्रेस ट्रेन 2 घंटे से ज्यादा लेट चल रही है. सिर्फ सेंट्रल रेलवे ही पूर्व मध्य रेलवे की कई ट्रेनें भी पिछले कई महीनों से नियमित रूप से देरी से चल रही हैं. इन ट्रेनों में सरयू-यमुना एक्सप्रेस, शहीद एक्सप्रेस, लिच्छवी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें शामिल हैं. वहीं रेल मंत्री और उनका मंत्रालय इन ट्रेनों को निर्धारित समय पर चलाने के बजाए पटरियों की मरम्मत और रखरखाव संबंधी कार्यों को ट्रेनों की लेटलतीफी के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए इस मामले को टालते हुए से दिखते हैं. इसके साथ-साथ वे यह भी कहते हैं कि सुरक्षा और समयबद्धता रेलवे की प्राथमिकताओं में से है. रेल मंत्री ने अपने ताजा ट्वीट में कहा है, ‘सुरक्षा और समयबद्धता रेलवे की प्राथमिकताओं में से है, पटरियों की मरम्मत और रखरखाव का कार्य तेज गति से किया जा रहा है, साथ ही डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के पूरा हो जाने से 2020 के शुरुआत से ट्रेनों की रफ्तार और समय पालन पूर्णतया ठीक हो जाएगा.’

ट्रेनों की लेट-लतीफी में रेलवे का रिकॉर्ड, एक तिहाई ट्रेनें नहीं चल रहीं टाइम पर

एक तिहाई से ज्यादा ट्रेनें चल रहीं लेट

बीते दिनों रेल मंत्रालय की ट्रेनों को समय पर चलाने से संबंधित सालाना रिपोर्ट जारी की गई. इस रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2017-18 में देशभर में चलने वाली ट्रेनों में से एक तिहाई ट्रेनें देरी से चल रही हैं. रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल 2017 से मार्च 2018 के बीच भारतीय रेल की 71.39 प्रतिशत ट्रेनें ही समय पर चलीं. वहीं, वित्तीय वर्ष 2016-17 में ट्रेनों के समय से चलने का आंकड़ा 76.69 प्रतिशत था. यानी 2017-18 में ट्रेनों के समय पालन में 5.30 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. गौरतलब है कि मंत्रालय की रिपोर्ट में भी ट्रेनों के देरी से चलने के लिए मेंटेनेंस संबंधी कार्यों को ही जिम्मेदार ठहराया गया. रिपोर्ट में कहा गया था कि वर्ष 2017-18 में 4426 जगहों पर 18 लाख से ज्यादा रखरखाव संबंधी काम किए गए. इस कारण ट्रेनें देर से चलीं. वहीं वर्ष 2016-17 में 2687 जगहों पर 15 लाख मेंटेनेंस संबंधी कार्य किए गए थे.