नई दिल्ली: सरकार ने बुधवार को कहा कि कम यात्री वाली ट्रेनों में आरक्षण चार्ट तैयार होने पर खाली रहने वाली सीट या बर्थ के लिए किराये रेलवे 10 फीसदी की छूट दे रही है. यह छूट मूल किराये में दी जाएगी. रेल राज्यमंत्री राजेन गोहेन ने लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में कहा, रेलवे में मांग समरूप नहीं है. सीजन के अनुसार मांग कम या ज्यादा होती है. यहां तक कि हर सीजन देश के सभी भागों में मांग एक समान नहीं होती है.

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उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2017-18 में भारतीय रेल की सभी आरक्षित ट्रेनों में कुल मिलाकर सीटें/बर्थ शतप्रतिशत भरी हुई थीं. उन्होंने कहा कि कम यात्रा वाली ट्रेनों में यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी के लिए कई कदम उठाए गए हैं. उन्होंने कहा सरकार ट्रेन की सेवा द्रुत करने और परिचालन की अवधि घटाने के लिए कदम उठाए हैं. खाली ट्रेनों में यात्रियों की संख्या बढ़ाने के लिए शयनयान श्रेणी के कोच को अनारक्षित द्वितीय श्रेणी या अनारक्षित शयनयान बनाने की घोषणा की गई है.

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3 साल में 50 हजार मौतें
रेल राज्यमंत्री ने बताया कि पिछले तीन सालों में रेल पटरियों पर ट्रेनों की चपेट में आकर करीब 50,000 लोगों की जान चली गयी. गोहेन ने लोकसभा में बताया कि 2015-2017 के बीच रेल पटरियों पर 49,790 लोगों की मौत हो ने की खबर है. रेल पटरियों पर अनाधिकार प्रवेश , सुरक्षा नियमों एवं एहतियात निर्देशों के उल्लंघन , ओवरब्रिजों की अनदेखी करने , मोबाइल फोनों एवं रेल पटरी पार करते समय अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल करने की वजह से ये मौतें हुईं.

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मंत्री ने कहा कि रेलवे ने ऐसे स्थिति से निपटने के लिए स्टेशनों पर नियमित घोषणाएं करने , उनसे फुटओवरब्रिजों के इस्तेमाल की अपील करने , अनाधिकार रुप से प्रवेश करने के विरुद्ध जागरुकता फैलाने , दीवार लगाने जैसे कई कदम उठाये हैं.