नई दिल्ली: राजस्थान में सबसे बड़ी पार्टी बनने के बाद कांग्रेस ने सरकार बनाने का दावा पेश किया है लेकिन मुख्यमंत्री चुनने में उसके पसीने छूट रहे हैं. बुधवार को हुई विधायक दल की बैठक में भी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बनेंगे या सचिन पायलट फैसला नहीं हो पाया. विधायकों ने यह काम अब राहुल गांधी को सौंप दिया है. राज्य में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार को लेकर विधायकों की राय जानने के लिये बुलाई गई बैठक पर कांग्रेस के एक विधायक ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि जब फैसला पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी को करना है तो विधायकों की राय का कोई मलतब नहीं है.Also Read - Rajasthan Chunav Results: पंचायत समिति सदस्य चुनाव में BJP और कांग्रेस ने जीतीं इतनी सीटें, जानें हर सीट का ताजा अपडेट

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पार्टी मुख्यालय में बुधवार सुबह बुलाई गई विधायक दल की बैठक में एक प‍ंक्ति का प्रस्ताव पारित कर दिया गया जिसमें विधायकों ने मुख्यमंत्री का फैसला करने का अधिकार कांग्रेस अध्यक्ष को दे दिया. डीग कुम्हेर से विधायक विश्वेंद्र सिंह ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा, जब मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार का फैसला पार्टी हाईकमान को ही करना है तो व्यक्तिगत स्तर पर विधायकों की राय लेने का कोइ मतलब नहीं है. मैं अपना समय पार्टी के पर्यवेक्षक को राय देने में क्यों बर्बाद करुंगा.

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विश्वेन्द्र सिंह ने कहा, ‘’मैं इससे सहमत नहीं हूं, मैं नाराज या नाखुश नहीं हूं. मैं पार्टी अध्यक्ष को फैसले लेने के लिए अधिकृत करने वाले प्रस्ताव से सहमत हूं लेकिन पार्टी पर्यवेक्षक का व्यक्तिगत स्तर पर विधायकों की राय जानने का कोई मतलब ही नहीं रह जाता जब यह निर्णय पार्टी हाईकमान को ही लेना है. राज्य में सात दिसंबर को हुए चुनाव में कांग्रेस ने 99 सीटों पर जीत दर्ज की है और वह राज्य में सरकार बनाने जा रही है.

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राजस्थान में मुख्यमंत्री पद की दौड़ में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत आगे हैं. मध्य प्रदेश में कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया प्रबल दावेदार हैं. तीनों राज्यों में मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए जबर्दस्त लॉबिंग के बीच कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पार्टी कार्यकर्ताओं से इन तीनों राज्यों में हर राज्य के मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी शीर्ष पसंद बताने को कहा है.

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सूत्रों के मुताबिक पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए एक अंदरूनी संदेश मंच (एप) का उपयोग करते हुए गांधी ने उन्हें ऑडियो संदेश भेजा है और उन्होंने उनसे अपने-अपने राज्यों में मुख्यमंत्रियों के चयन के लिए फीडबैक मांगा है. बार-बार इस संबंध में जानने का प्रयास किए जाने के बावजूद पार्टी प्रवक्ताओं ने इस संदेश और उसके मजमून पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया. यह संदेश कब भेजा गया है, उसका सटीक समय भी नहीं पता चल पाया है.