नई दिल्ली| राजस्थान में हुए उपचुनावों में मिली हार के बाद सूबे में बीजेपी की स्थिति बदल रही हैं. 2013 के विधानसभा चुनाव और 2014 के आम चुनाव में शानदार प्रदर्शन करने वाली पार्टी के लिए हाल ही में आए अलवर और अजमेर लोकसभा सीटों और मांडलगढ़ विधानसभा सीट के उपचुनाव के नतीजों ने मुश्किलें बढ़ा दी है. हार के बाद सूबे में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खिलाफ आवाज उठने लगी है. बीजेपी के एक नेता ने पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को पत्र लिखकर राजे को पद से हटाने की मांग की है.
वसुंधरा के खिलाफ हो रहे विरोध के बावजूद बीजेपी आलाकमान उनपर कार्रवाई करने के मूड में नजर नहीं आ रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि सूबे में बीजेपी के पास कोई और दूसरा नेता नहीं हैं. वसुंधरा के आलावा राजस्थान बीजेपी में कोई ऐसा नेता नजर नहीं आता जो उनके कद को मैच कर सकें.
पार्टी के दूसरी कतार के नेताओं में ज्यादातर ऐसे नेता हैं जिनके लिए अपनी सीट जीतना भी चुनौती ही होगी. इसके आलावा सूबे के सभी समुदायों को लुभाने की क्षमता भी केवल राजे में ही है. कुछ नेता हैं जो अपने क्षेत्र में मजबूत हैं मगर पुरे सूबे में उनकी पकड़ नहीं हैं.
सियासी पंडितों की माने तो अगर पार्टी आलाकमान राजे को हटाने का फैसला लेती है तो पार्टी दो हिस्सों में बंट सकती हैं. इसका खामियाजा पार्टी को इस साल होने वाले विधानसभा और अगले साल होने वाले आम चुनावों में भुगतना पड सकता है. बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं को यह डर है कि जैसा 2013 में येदियुरप्पा को हटाने के बाद कर्नाटक में पार्टी का हाल हुआ था वैसा ही कही राजस्थान में ना हो.
पार्टी आलाकमान को लगता है कि अगर वसुंधरा को नाराज किया गया तो यह पार्टी को भारी पड़ सकता हैं. ठीक उसी तरह जैसे 2013 में कर्नाटक में येदियुरप्पा ने पार्टी का नुकसान किया था. कुल मिलाकर, राजस्थान में बीजेपी के पास जीत का कोई और चहरा नहीं है. लोगों की नाराजगी के बावजूद बीजेपी शायद उनकी अगुवाई में ही चुनाव लड़ने का फैसला करे.
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