नई दिल्ली. राजीव गांधी हत्याकांड के सात दोषियों को रिहा करने की तमिलनाडु सरकार के अनुरोध को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा कथित तौर पर खारिज किए जाने के बाद एक दोषी व्यक्ति की मां ने अपने बेटे की ‘दया मृत्यु’ की मांग की है. एजी पेरारीवलन की मां अयपुथम्मल ने वेल्लोर जिला में संवाददाताओं से कहा, ‘लंबी कानूनी लड़ाई और ताजा घटनाक्रम के बाद अब हम हताश हो गए हैं.’ उन्होंने कहा, ‘हम अब और जीना नहीं चाहते. मैं केंद्र और राज्य सरकार से यह अनुरोध करने की योजना बना रही हूं कि हमें मार डाला जाए. मैं यह करने जा रही हूं…, कृपया मेरे बेटे को दया मृत्यु दीजिए.’ दोषी पेरारीवलन को मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है. Also Read - केंद्र ने राजीव गांधी हत्याकांड के दोषियों को रिहा करने के तमिलनाडु सरकार के फैसले को किया खारिज

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के मामले में सात दोषी- मुरूगन, पेरारीवलन, संतन, जयकुमार, राबर्ट पायस, रविचंद्रन और नलिनी- 20 साल से अधिक समय से जेल में कैद हैं. पेरारीवलन की मां ने अदालत को दिए सीबीआई के एक पूर्व अधिकारी के बयान को याद करते हुए कहा कि दोषी के इकबालिया बयान के एक हिस्से को हटा दिया गया. उन्होंने पेरारीवलन का बयान दर्ज किया था. अयपुथम्मल ने कहा, ‘मामले में पूछताछ के बहाने पुलिस मेरे बेटे को उठा ले गई थी. वह उस वक्त 19 साल का था और अब उसकी उम्र 47 साल की हो गई है. उसकी युवावस्था और उसके जीवन का महत्वपूर्ण समय बर्बाद हो गया.’ उन्होंने कहा कि यहां तक कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल ने दोषियों को माफ कर दिया. इधर, अभियोजन पक्ष के मामले के मुताबिक पेरारीवलन ने दो बैटरी खरीदी थी, जिसका इस्तेमाल मई 1991 में एक चुनाव रैली में पूर्व प्रधानमंत्री की श्रीपेरम्बुदूर में हत्या करने में किया गया. Also Read - rajeev gandhi's 25th death anniversary: what happened on that night | राजीव गाँधी पुण्यतिथिः क्या हुआ था 25 साल पहले की उस मनहूस रात को...?

सुप्रीम कोर्ट ने भी नहीं की थी दोबारा सुनवाई
गौरतलब है कि तमिलनाडु सरकार ने पांच जून को कहा था कि यह राजीव गांधी हत्या मामले के दोषियों को रिहा करने के पक्ष में है, लेकिन यह विषय उच्चतम न्यायालय में लंबित है. वहीं, इसी साल मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दोषी ए.जी. पेरारीवलन की उस याचिका पर सुनवाई करने से इंकार कर दिया था, जिसमें उसने इस मामले को दोबारा खोले जाने की मांग की थी. पेरारीवलन को वर्ष 1999 में पूर्व प्रधानमंत्री की हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी. न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की पीठ ने पेरारीवलन की याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यायालय के आदेश पर पुनर्विचार करने से इंकार कर दिया था. कोर्ट ने कहा था कि अदालत के निर्णय पर दोबारा विचार करने की जरूरत नहीं है. हम इस संबंध में याचिका को खारिज करते हैं. पेरारीवलन उन सात दोषियों में शामिल है जिसे राजीव गांधी हत्याकांड मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी.

(इनपुट – एजेंसी)