कोलकाता: कोलकाता की विशेष अदालत ने मंगलवार को शहर के पूर्व पुलिस आयुक्त राजीव कुमार की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया. दरअसल, कुमार को सीबीआई ने करोड़ों रुपये के शारदा चिट-फंड घोटाले में पेश होने के लिए नोटिस दिया है. कुमार को मंगलवार की सुबह केंद्रीय जांच ब्यूरो के समक्ष हाजिर होना था जहां वो हाजिर न हो सके. उनके जांच एजेंसी के सामने आने में विफल रहने के कारण अब उनकी गिरफ्तारी की संभावना बढ़ गयी है. गिरफ्तारी से बचने के लिए कुमार ने अपनी अग्रिम जमानत के लिए बारासात की एक विशेष अदालत का रुख किया था.

विशेष अदालत के न्यायाधीश संजीब तालुकदार ने कुमार की याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है. सांसदों और विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों की सुनवाई के प्रभारी विशेष अदालत ने कहा कि यह एक निचली अदालत है और उसे अग्रिम जमानत की अर्जी पर सुनवाई करने का अधिकार नहीं है. अदालत ने कहा कि कुमार अपनी याचिका को लेकर बारासात के जिला सत्र न्यायालय जा सकते हैं.

गौरतलब है कि 13 सितंबर को, कलकत्ता उच्च न्यायालय ने कोलकाता के पूर्व पुलिस आयुक्त को शारदा चिट-फंड घोटाला मामले में गिरफ्तारी से संरक्षण का अपना अंतरिम आदेश वापस ले लिया था. उच्च न्यायालय ने सीबीआई के नोटिस को रद्द करने संबंधी कुमार की याचिका को भी खारिज कर दिया था.

सीबीआई तलाश रही अन्य कानूनी विकल्प

सूत्रों ने बताया कि शुक्रवार को कोलकाता उच्च न्यायालय द्वारा राजीव कुमार को गिरफ्तारी से दिया गया संरक्षण वापस लिए जाने के बाद सीबीआई ने उन्हें पेशी के लिए दो बार नोटिस जारी किया था. एजेंसी ने उन्हें सुबह 10 बजे पेश होने को कहा था लेकिन वह पेश नहीं हुए. सीबीआई ने अब कानून के तहत इस मामले में उपलब्ध अन्य विकल्प तलाशने शुरू कर दिए हैं.

पश्चिम बंगाल के डीजीपी ने सोमवार को एक पत्र के जरिए सीबीआई को बताया था कि उनके नोटिस कुमार के आधिकारिक आवास पर भेजे गए थे और अभी उनका जवाब मिलना बाकी है. पत्र में शीर्ष पुलिस अधिकारी ने कहा था कि अपने वकील के जरिए कुमार ने उन्हें बताया था कि वह 25 सितंबर तक छुट्टी पर हैं.

उन्होंने यह भी कहा था कि वह कानूनी उपाय तलाशने का प्रयास कर रहे हैं. कुमार की अग्रिम जमानत याचिका मंगलवार को सीबीआई की विशेष अदालत में आने की संभावना है. गौरतलब है कि शारदा ग्रुप आफ कंपनीज ने लोगों को उनके निवेश पर भारी मुनाफा देने का लालच देकर उनका करीब 2500 करोड़ रूपया हड़प लिया.

आपको बता दें कि कुमार वर्तमान में पश्चिम बंगाल सीआईडी के अतिरिक्त महानिदेशक हैं. वह घोटाले की जांच के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित एक विशेष जांच दल में शामिल थे. उच्चतम न्यायालय ने 2014 में चिट-फंड के अन्य मामलों के साथ इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी.