चेन्नई: दक्षिण भारत सुपरस्‍टार एक्‍टर रजनीकांत ने शनिवार को कहा कि लंबे समय से पालन की जा रही मंदिर की परंपराओं में कोई भी हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए. सबरीमला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश की अनुमति देने वाले सुप्रीम कोर्ट के आदेश और उसके बाद से हो रहे प्रदर्शनों पर एक्‍टर से नेता बने रजनीकांत की यह पहली टिप्पणी है. Also Read - कमल हासन का बड़ा बयान, 2021 में विधानसभा चुनाव लड़ूंगा, रजनीकांत से मांगूंगा समर्थन

रजनीकांत ने चेन्‍नई में मीडियाकर्मियों से बात करते हुए कहा कि प्रत्येक क्षेत्र में महिलाओं की बराबरी को लेकर कोई दूसरा मत नहीं है. Also Read - Sabarimala Pilgrimage: अगले महीने से शुरू होगी प्रसिद्ध सबरीमाला तीर्थयात्रा, लेकिन लग सकती है यह पाबंदी

रजनीकांत ने कहा, ”जब आप किसी मंदिर के बारे में बात करते हैं तो प्रत्येक मंदिर के कुछ रीति-रिवाज एवं परंपराएं होती हैं जिनका लंबे समय से पालन हो रहा है. मेरी विनम्र राय यह है कि किसी को भी उसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए.”

रजनीकांत ने कहा कि शीर्ष अदालत के फैसले का सम्मान होना चाहिए, हालांकि, इस ओर भी इशारा किया कि बात जब धर्म एवं संबंधित रिति-रिवाजों की हो तो एहतियात बरतना चाहिए.

सरकार ने जब से कहा है कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पालन करेगा, तभी से सबरीमला मंदिर में रजस्वला आयु वर्ग की लड़कियों एवं महिलाओं के प्रवेश के खिलाफ केरल में लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.

मी टू अभियान पर रजनीकांत ने कहा कि यह महिलाओं के लिए हितकारी था. हालांकि, उन्होंने चेताया, इसका दुरुपयोग नहीं होना चाहिए और उचित तरीके से प्रयोग होना चाहिए.