नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सुपरस्टार रजनीकांत की पत्नी लता रजनीकांत को एक विज्ञापन एजेंसी के बकाए का भुगतान नहीं करने के मामले में उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही का रास्ता साफ कर दिया है. शीर्ष कोर्ट ने मंगलवार को कर्नाटक हाई कोर्ट का आदेश निरस्त कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह ऐसा मामला है, जिसमें विज्ञापन एजेंसी की शिकायत के बाद सुनवाई होनी चाहिए थी. अदालत ने कहा कि लता उचित मंच पर आरोपमुक्त होने के लिए याचिका दायर कर सकती हैं.

जस्टिस रंजन गोगोई , जस्टिस आर भानुमति और जस्टिस नवीन सिन्हा की खंडपीठ ने कहा कि लता के खिलाफ कार्यवाही रद्द करने की हाईकोर्ट की कार्यवाही न्यायोचित नहीं थी. विज्ञापन एजेन्सी एडी – ब्यूरो एडवर्टाइजिंग प्रा: लि: की शिकायत पर निचली अदालत ने लता के खिलाफ कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया था.

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा , ”यह ऐसा मामला है जिसकी सुनवाई होनी चाहिए थी. आप (लता) उचित अवसर पर इससे आरोप मुक्त करने के लिए आवेदन कर सकती हैं. ” शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के 10 मार्च , 2016 के आदेश के खिलाफ विज्ञापन एजेंसी की अपील पर यह आदेश दिया.

ये है मामला
इस विज्ञापन एजेंसी ने अपनी निजी शिकायत में आरोप लगाया था कि वे 2014 में ‘कोचादायीयान’ के निर्माण के बाद के कारोबार में शामिल हुए थे. इस फिल्म का निर्माण मेसर्स मीडियावन ग्लोबल इंटरटेनमेंट लि: ने किया था और लता की व्यक्तिगत गारंटी पर उसने इसके लिए दस करोड़ रुपए दिए थे. वह इस निर्माण कंपनी की एक निदेशक थीं. विज्ञापन एजेंसी का दावा था कि मीडियावन ग्लोबल एंटरटेनमेंट को उसे 10 करोड़ रुपए और 1.2 करोड़ रुपए गारंटी लाभ की राशि वापस करनी थी परंतु यह धन नहीं लौटाया गया है.

सुप्रीम कोर्ट में ऐसी हुई सुनवाई
इस मामले में सुनवाई के दौरान लता के वकील ने कहा कि एजेन्सी 20 करोड़ रुपए देने पर राजी हुई थी, परंतु उसने बाद में सिर्फ 10 करोड़ रुपए का भी भुगतान किया था. इस पर पीठ ने कहा, ” क्योंकि उन्होंने आपको 20 करोड़ रूपए नहीं दिए, इसलिए आप वह रकम भी रोक लेंगी, जो उसने आपको दी थी.” इससे पहले, सुनवाई शुरू होते ही विज्ञापन एजेंसी के वकील ने कहा कि लता रजनीकांत ने शीर्ष अदालत को दिए गए आश्वासन देने के बाद भी उसे धन का भुगतान नहीं किया. इस पर पीठ ने कहा, ”हमने इस अध्याय को बंद कर दिया है. हम अब गुण दोष पर फैसला करेंगे. आप बतायें कि क्या शिकायत थी और किस आधार पर उच्च न्यायालय ने इसे रद्द किया था. ’’

6.2 करोड़ देने के आदेश का पालन नहीं होने पर लगाई डांट
विज्ञापन एजेंसी के वकील ने हाई कोर्ट का आदेश पढकर सुनाया और कहा कि कार्यवाही इस आधार पर निरस्त कर दी गई कि यह दीवानी सरीखा विवाद था. पीठ ने हाईकोर्ट का आदेश निरस्त करते हुए लता के वकील से कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत मामले की अलग अलग चरण होते हैं और उन्हें उचित राहत के लिए अदालत जाने का अधिकार है. न्यायालय ने अदालत के सामने विज्ञापन एजेंसी को 6.2 करोड़ रुपए का भुगतान करने के आदेश पर अमल नही करने की वजह से तीन जुलाई को लता को आड़े हाथ लिया था. (इनपुट-एजेंसी)