रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने बेलारूसी समकक्ष लेफ्टिनेंट जनरल विक्टर ख्रेनिन के साथ दुशान्बे में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सम्मेलन से इतर बुधवार को द्विपक्षीय वार्ता की. अधिकारियों ने बताया कि दोनों मंत्रियों ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग पर चर्चा की और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर भी बात की.Also Read - फैजाबाद कैंट का नाम बदलकर अयोध्या छावनी हुआ, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी मंजूरी

रक्षा मंत्रालय ने ट्वीट किया, “रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बेलारूस के रक्षा मंत्री, लेफ्टिनेंट जनरल विक्टर ख्रेनिन से दुशान्बे में एससीओ रक्षा मंत्रियों की बैठक से इतर मुलाकात की.” Also Read - राजनाथ सिंह ने अमेरिकी रक्षा मंत्री से पाकिस्तान के F-16 फाइटर जेट बेड़े के लिए पैकेज पर जताई चिंता

रक्षा मंत्री एससीओ के सदस्य राष्ट्रों के रक्षा मंत्रियों के सम्मेलन में शामिल होने के लिए तीन दिवसीय यात्रा पर मंगलवार को ताजिकिस्तान की राजधानी में हैं. Also Read - भारत तीनों सेवाओं के एकीकरण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

सम्मेलन में अपने संबोधन में, सिंह आंतकवाद और क्षेत्र की अन्य सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के ठोस प्रयासों पर जोर डाल सकते हैं. रक्षा मंत्री ताजिकिस्तान के अपने समकक्ष कर्नल जनरल शेर अली मिर्जा से भी मुलाकात कर सकते हैं जहां वह द्विपक्षीय के साथ-साथ परस्पर हित के अन्य मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे.

ताजिकिस्तान इस साल एससीओ की अध्यक्षता कर रहा है और आधिकारिक स्तर एवं मंत्रिस्तरीय बैठकों की मेजबानी कर रहा है. नाटो के बराबर समझा जाने वाला एससीओ, आठ सदस्यीय आर्थिक एवं सुरक्षा गुट है और सबसे बड़े अंतरक्षेत्रीय अंतरराष्ट्रीय संगठनों में से एक के रूप में उभरा है. भारत और पाकिस्तान 2017 में इसके स्थायी सदस्य बने थे.

एससीओ की स्थापना 2001 में शंघाई में रूस, चीन, किर्गिज गणराज्य, कजाकिस्तान, ताजिकिस्तान और उजबेकिस्तान के राष्ट्रपतियों ने एक शिखर सम्मेलन में की थी.

भारत ने एससीओ और इसके क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी ढांचे (आरएटीएस) के साथ अपने सुरक्षा-संबंधी सहयोग को गहरा करने में गहरी दिलचस्पी दिखाई है, जो विशेष रूप से सुरक्षा और रक्षा से संबंधित मुद्दों से संबंधित है.

भारत को 2005 में एससीओ में एक पर्यवेक्षक बनाया गया था और उसने सामान्य तौर पर समूह की मंत्री स्तरीय बैठकों में भाग लिया है जो मुख्य रूप से यूरेशियाई क्षेत्र में सुरक्षा और आर्थिक सहयोग पर केंद्रित है.