नई दिल्ली: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि भारत कभी आक्रमणकारी नहीं रहा है लेकिन उसके सशस्त्र बल उसपर बुरी नजर डालने वालों को करारा जवाब देने में सक्षम हैं. सिंह ने नौसेना कमांडरों के सम्मेलन में मीडिया से कहा कि नौसेना ने यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी सतर्कता बरती है कि 26/11 दोबारा नहीं हो. उन्होंने कहा कि भारत कभी ‘‘आक्रमणकारी’’ नहीं रहा है. मंत्री ने कहा, ‘‘इसका चरित्र रहा है कि उसने किसी देश पर हमला नहीं किया है और उसने किसी अन्य देश की एक इंच जमीन पर कब्जा नहीं किया है, लेकिन सशस्त्र बलों में हम पर बुरी नजर डालने वाले हर व्यक्ति को करारा जवाब देने की क्षमता और ताकत है.’’

पाकिस्तान के रेल मंत्री शेख राशिद अहमद ने कथित रूप से कहा है कि उनका देश जम्मू कश्मीर के तंगधार सेक्टर में पाकिस्तानी सैन्य चौकियों को निशाना बनाने के लिए परमाणु हमला करके भारत को जवाब देगा. सिंह इस बारे में पूछे गए सवालों का जवाब दे रहे थे. भारतीय सैन्य अधिकारियों ने बताया कि सेक्टर में पाकिस्तान ने शनिवार-रविवार की बीच रात में अकारण गोलीबारी की. उन्होंने बताया कि पाकिस्तान की गोलीबारी के जवाब में भारतीय सेना ने रविवार को जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा के पास तंगधार सेक्टर के दूसरी ओर कम से कम चार आतंकवादी शिविरों और कई पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों को भारी हथियारों का इस्तेमाल कर निशाना बनाया था.

रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि सीडीएस (चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ) को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा पर सिंह ने कहा कि इससे तीनों सेनाओं के बीच समन्वय बढेगा. नौसैन्य कमांडरों का तीन दिवसीय सम्मेलन मंगलवार को शुरू हुआ. सिंह ने कहा कि वैश्विक आतंकवाद सभी सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बना हुआ है. उन्होंने खतरों और चुनौतियों से मुकाबले के लिए नौसेन्य कमांडरों को तटीय सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने और प्रक्रिया की समीक्षा करने का अनुरोध किया. रक्षा मंत्री ने भरोसा जताया कि भारत के समुद्र भारतीय नौसेना के हाथों में पूरी तरह सुरक्षित हैं. उन्होंने मुंबई में नवंबर 2008 में हुए आतंकवादी हमलों का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘हमारी नौसेना ने संकल्प लिया है कि किसी भी हालत में 26/11 दोबारा नहीं होने पाए और उसने इसके लिए कड़ी सतर्कता सुनिश्चित की है.’’ सिंह ने कहा कि भारतीय नौसेना स्वदेशीकरण की ओर बढ़ रही है और उसकी नौकाओं में बड़ी संख्या में स्वदेशी उपकरण हैं. उन्होंने कहा कि सभी तीनों रक्षा सेवाओं ने रक्षा आयात कम करने की आवश्यकता पर बल दिया है.

(इनपुट भाषा)