नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने देश की प्रमुख 10 एजेंसियों को किसी भी व्यक्ति या संस्थान के कंप्यूटर का डाटा खंगालने का अधिकार के मुद्दे पर केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है. रविवार को उन्होंने कहा कि मंत्रालय ने इस बाबत पहले ही स्पष्टीकरण जारी कर दिया है. मैं इसपर अभी कुछ नहीं कहूंगा. संसद सत्र चल रहा है. वहां मुझसे इस पर सवाल पूछा जाएगा तो मैं जवाब दूंगा. बता दें कि 20 दिसंबर 2018 को गृह मंत्रालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार प्रमुख जांच एजेंसियों को यह अधिकार देने की बात कही गई है. इन एजेंसियों को ये अधिकार होगा कि वे इंटरसेप्शन, मॉनिटरिंग और डिक्रिप्शन के मकसद से किसी भी कंप्यूटर का डाटा खंगाल सकें.

गृह सचिव राजीव गौबा की ओर से जारी आदेश के अनुसार, सूचना प्रौद्योगिकी (सूचना के इंटरसेप्शन, निगरानी और डिक्रिप्टेशन के लिए प्रक्रिया और सुरक्षा उपाय) नियम, 2009 के नियम 4 के साथ पठित सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 69 की उपधारा (1) की शक्तियों का प्रयोग करते हुए उक्त अधिनियम के अंतर्गत संबंधित विभाग, सुरक्षा व खुफिया एजेंसियों को किसी भी कंप्यूटर में आदान-प्रदान किए गए, प्राप्त किए गए या संग्रहित सूचनाओं को इंटरसेप्ट, निगरानी और डिक्रिप्ट करने के लिए प्राधिकृत करता है.

ये हैं एजेंसियां
यह 10 एजेंसियां खुफिया ब्यूरो, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड, राजस्व खुफिया निदेशालय, कैबिनेट सचिव (रॉ), डायरेक्टरेट ऑफ सिग्नल इंटिलिजेंस (केवल जम्मू एवं कश्मीर, पूर्वोत्तर और असम के सेवा क्षेत्रों के लिए) और दिल्ली पुलिस आयुक्त हैं. अधिसूचना में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि किसी भी कंप्यूटर संसाधन के प्रभारी सेवा प्रदाता या सब्सक्राइबर इन एजेंसियों को सभी सुविधाएं और तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए बाध्य होंगे.

7 वर्ष की सजा
इस संबंध में कोई भी व्यक्ति या संस्थान ऐसा करने से मना करता है तो ‘उसे सात वर्ष की सजा भुगतनी पड़ेगी. सरकार की ओर से इस आदेश को जारी करने के बाद कांग्रस और अन्य पार्टियों ने कड़ा एतराज जताया. कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने ट्वीट कर कहा, इस बार, निजता पर हमला. सुरजेवाला ने ट्वीट कर कहा, मोदी सरकार खुले आम निजता के अधिकार का हनन कर रही है और मजाक उड़ा रही है. चुनाव में हारने के बाद, अब सरकार कंप्यूटरों की ताका-झाकी करना चाहती है? एनडीए के डीएनए में बिग ब्रदर का सिंड्रोम सच में समाहित है.