नई दिल्ली: राज्यसभा का 31 जनवरी को शुरू हुआ सत्र बुधवार को अनिश्चित काल के लिए स्थगित हो गया. इसके साथ ही नागरिकता संशोधन विधेयक और तीन तलाक विधेयक राज्यसभा में पास नहीं हो पाया. नागरिकता संशोधन विधेयक का एनडीए की सहयोगी पार्टियों सहित विपक्ष ने विरोध किया था. हालांकि पहले चर्चा थी कि सरकार इस बिल को हर हाल में पास कराना चाहती है, लेकिन नॉर्थ ईस्ट में भारी विरोध के बीच सरकार ने इस बिल को राज्यसभा में नहीं रखा. इस विधेयक के कानून बनने के बाद, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्म के मानने वाले अल्पसंख्यक समुदायों को 12 साल की बजाय महज छह साल भारत में गुजारने और बिना उचित दस्तावेजों के भी भारतीय नागरिकता मिल जाती.

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इस विधेयक को शीतकालीन सत्र के दौरान आठ जनवरी को लोकसभा ने पारित किया था. तीन तलाक बिल भी राज्यसभा से पास नहीं हो पाया. राज्यसभा के स्थगित होने के साथ ही दोनों बिल अब रद्द हो गए हैं. नियमों के मुताबिक अगर कोई बिल लोकसभा में पास हो गया है और राज्यसभा में पास नहीं हो पाया है तो राज्यसभा के स्थगित होने के साथ ही बिल रद्द हो जाता है लेकिन अगर कोई बिल लोकसभा में पास नहीं हो पाया है और राज्यसभा में भी पेंडिंग है तो वह लैप्स नहीं होता.

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लगभग पूरा सत्र विभिन्न दलों के हंगामे की भेंट चढ़ गया और पूरे सत्र में महज तीन घंटे से कुछ अधिक समय ही काम हो पाया. सत्र के अंतिम दिन अंतरिम बजट और राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को बिना चर्चा के मंजूरी दे दी गई. सत्र को अनिश्चित काल के लिए स्थगित करने से पहले सभापति एम वेंकैया नायडू ने अपने पारंपरिक उद्बोधन में सत्र को ‘गंवा दिया गया अवसर’ बताया और उम्मीद जताई कि अगले सत्र में विभिन्न दलों के सदस्य सकारात्मक योगदान देंगे.

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नायडू ने कहा कि वर्तमान सत्र में होने वाली कुल दस बैठकों में कामकाज के 48 घंटों में से करीब 44 घंटे हंगामे की भेंट चढ़ गए. इस दौरान कुल पांच विधेयक पारित किए गए या लौटाए गए और सदन के कामकाज का प्रतिशत मात्र 4.9 रहा. सत्र के दौरान छह विधेयकों को पेश किया गया. इस दौरान हंगामे के कारण विशेष उल्लेख के जरिये कोई भी लोक महत्व का मुद्दा नहीं उठाया जा सका. वंदे मातरम की धुन बजाए जाने के बाद सभापति ने बैठक को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया. गत 31 जनवरी को संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति के अभिभाषण के साथ वर्तमान सत्र प्रारंभ हुआ था. एक फरवरी को लोकसभा में अंतरिम बजट पेश किया गया और उसी दिन इसकी प्रति उच्च सदन में रखी गई.

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सत्र के दौरान राफेल विमान सौदे, 13 प्वॉइंट रोस्टर, नागरिकता विधेयक, सपा नेता अखिलेश यादव को प्रयागराज में आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने से रोकने, कोलकाता में सीबीआई की कार्रवाई सहित विभिन्न मुद्दों पर विपक्षी दलों के सदस्यों के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही लगातार बाधित रही. हंगामे के चलते सदन में एक भी दिन प्रश्नकाल एवं शून्यकाल सुचारू रूप से नहीं चल पाए. सत्र के दौरान अंतरिम बजट और वित्त विधेयक के अलावा संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश (तीसरा संशोधन) विधेयक 2019 और वैयक्तिक कानून (संशोधन) 2019 पारित किए गए.