नई दिल्ली| आंध्र प्रदेश को विशेष पैकेज दिए जाने की मांग करते हुए आसन के समक्ष आ कर आज विरोध जता रहे कांग्रेस के सांसद के वी पी रामचंद्र राव ने जब विरोध खत्म करने से इंकार किया तो सभापति एम वेंकैया नायडू ने नियम 255 के तहत उन्हें पूरे दिन के लिए सदन की कार्यवाही से बाहर रहने का आदेश दिया. उच्च सदन में शून्यकाल शुरू होने पर, राव एक पर्चा ले कर आसन के समक्ष आ गए. इस पर्चे में आंध्रप्रदेश के लिये न्याय की खातिर लड़ाई में मदद की अपील की गई थी. Also Read - बिहार विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद अब इस तैयारी में विपक्षी महागठबंधन...

नायडू ने राव से कहा कि वह सदन में पर्चा नहीं दिखा सकते. उन्होंने राव से अपने स्थान पर लौट जाने को भी कहा. लेकिन राव नहीं लौटे. इसी दौरान कुछ सदस्यों ने नायडू से कार्यवाही आगे बढ़ाने का अनुरोध किया. लेकिन सभापति ने कहा कि अगर एक भी सदस्य आसन के समक्ष है तो इसका मतलब है कि सदन में व्यवस्था नहीं है. उन्होंने राव से अपने स्थान पर लौट जाने के लिए बार बार कहा। राव के वहीं खड़े रहने पर नायडू ने कहा कि वह इस तरह के आचरण को बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि उनके सामने दो विकल्प हैं। पहला… वह सदन की कार्यवाही स्थगित कर दें और दूसरा… सदस्य का नाम पुस्तिका में डालें. Also Read - राहुल गांधी का 'मन की बात' पर निशाना, कहा- पीएम मोदी किसानों की बात करते तो बेहतर होता

सभापति ने कांग्रेस के सदस्यों से राव को वापस बुलाने के लिए कहा. विपक्ष के नेता एवं कांग्रेस के वरिष्ठ सदस्य गुलाम नबी आजाद ने कहा कि उनकी पार्टी राव के आचरण को स्वीकृति नहीं देती. Also Read - भाजपा-संघ की सोच के अनुसार दलितों-आदिवासियों नहीं मिलनी चाहिए शिक्षा: राहुल गांधी

बार बार कहने के बावजूद जब राव अपने स्थान पर नहीं गए और पर्चा ले कर आसन के सामने ही खड़े रहे तब नायडू ने राज्यसभा की नियम पुस्तिका से नियम 255 को उद्धृत करते हुए कहा कि सभापति को अगर लगता है कि कोई सदस्य का आचरण गंभीर व्यवधान डाल रहा है तो वह उसे परिषद से तत्काल वापस बुलाए जाने का आदेश दे सकते हैं. आदेश के बाद सदस्य को वापस जाना चाहिए और शेष दिन की कार्यवाही में अनुपस्थित रहना चाहिए.

इस बीच राव को कांग्रेस के अन्य सदस्यों ने वापस आने के लिए कहा लेकिन उन्होंने सहयोगियों की बात अनसुनी कर दी. फिर वह पूरे घटनाक्रम को ‘‘अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण’’ बताते हुए अपने स्थान पर गए और अपना सामान ले कर सदन से बाहर चले गए.

इसके बाद सदन में कामकाज सामान्य रूप से चला.