Gujrat Congress Conflict: पिछले कुछ वर्षों से कांग्रेस पार्टी को नेतृत्व संकट के कारण लगातार मात खानी पड़ रही है. कुछ ऐसी ही स्थिति आगामी राज्यसभा चुनाव में भी देखने को मिलने वाली है. पार्टी पर्याप्त विधायक संख्या होने के बावजूद गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश और झारखंड में भाजपा के चक्रव्यूह में फंस गई है. हम आज बात गुजरात की करते हैं. यहां पर कांग्रेस पार्टी केवल एक विधायक की कमी की वजह से एक राज्यसभा सीट गंवा सकती है. Also Read - Political Crisis in Rajasthan Update: भाजपा में शामिल होेने के सवाल पर पहली बार बोले सचिन पायलट, कही ये बात

गुजरात में चार सीट पर चुनाव हो रहे हैं. इसके लिए पांच उम्मीदवार मैदान में हैं. कांग्रेस ने दो और भाजपा ने तीन उम्मीदवार उतारे हैं. अगर कांग्रेस के विधायक इस्तीफा नहीं दिए होते तो पार्टी आसानी से दो सीटों पर जीत हासिल कर लेती. इस वक्त राज्य विधानसभा में कांग्रेस के 65 विधायक हैं. इसमें पिछले कुछ महीनों में इस्तीफा देने वाले 8 विधायक शामिल नहीं हैं. राज्य में पार्टी को भारतीय ट्राइबल पार्टी और एनसीपी के एक-एक विधायक और निर्दलीय जिग्नेश मेवाणी के वोट की उम्मीद है. इस तरह उसके पास 68 विधायक हो सकते हैं. इनके समर्थन के बावजूद पार्टी को दी सीटें जीतने के लिए एक वोट की कमी पड़ रही है. इसके लिए राज्य में पार्टी का चुनाव प्रबंधन कमेटी पूरा जोर लगा रही है. वह चाह रही है कि वह 2017 की तरह वह इस बार भी चुनाव में जीत हासिल कर लेगी, लेकिन यह आसान नहीं है. Also Read - राजस्थान के बाद छत्तीसगढ़ कांग्रेस में भी होगी बगावत! सीएम बघेल ने समय रहते उठाया ये कदम

दरअसल, 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने राज्य में काफी अच्छा प्रदर्शन किया था. लेकिन उसके बाद वह एकजुट नहीं रही. सदन में पार्टी बंट गई. पार्टी के भीतर गुटबाजी के लिए कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को जिम्मेवार ठहराया जाने लगा. राज्य में भी पार्टी के पुराने नेता और राहुल गांधी के युवा ब्रिगेड के बीच मतभेद खुलकर सामने आने लगे और नतीजा यह हुआ कि कांग्रेस अपने ही विधायकों को बचाने में नाकाम रही. Also Read - सचिन पायलट को पद से हटाए जाने पर कांग्रेस में इस्तीफों की झड़ी, NSUI और कई पार्टी पदाधिकारियों ने दिया इस्तीफा

इस बार के चुनाव में गांधी परिवार के करीबी और पार्टी के कोषाध्यक्ष अहमद पटेल की सिफारिश पर शक्ति सिंह गोविल और भरत सोलंकी को मैदान में उतारा गया है. लेकिन पार्टी के कई विधायक इस फैसले से नाराज बताए जा रहे थे. इसी कारण पिछले तीन माह में 8 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया. दूसरी तरफ इस मौके का फायदा उठाने में भाजपा पीछे नहीं रही. उसने अपना तीसरा उम्मीदवार उतार दिया.

राज्य में एक राज्यसभा सीट पर जीत के लिए 34 विधायकों की जरूरत है. अगर विधायकों ने इस्तीफा नहीं दिया होता तो कांग्रेस के पास 77 विधायक थे और वह आसानी से दो सीट जीत लेती, लेकिन अब राह कठिन हो गया है.