BJP Strategy in Rajasthan Rajya Sabha election: आज से ठीक तीन दिन बाद यानी 19 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले ऐसा लगता है कि कांग्रेस पार्टी आत्मविश्वास खो चुकी है. राजस्थान की तीन राज्यसभा सीटों पर 19 जून को वोटिंग होगा. इन तीन सीटों के लिए चार उम्मीदवार मैदान में हैं. कांग्रेस पार्टी ने वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल और नीरज डांगी को उम्मीदवार बनाया है जबकि भाजपा ने राजेंद्र गहलोत और ओंकार सिंह लखावत को उम्मीदवार बनाया है. Also Read - पार्टी सचिन पायलट को सुनने के लिए तैयार है, मीटिंग में आने का इंतजार: कांग्रेस महासचिव

दरअसल, सवाल यह है कि कांग्रेस के पास पर्याप्त संख्या में विधायक होने के बावजूद वह इनता भयभीत क्यों है. क्या उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की आक्रामक राजनीति से डर लग रहा है? राजस्थान की 200 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के 107 विधायक हैं. उसे 12 निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन प्राप्त है. इस तरह उसके पास कुल 119 विधायक हैं. दूसरी तरफ राज्यसभा चुनाव में एक प्रत्यासी को जीत के लिए 51 विधायकों के समर्थन की जरूरत है. इस तरह कांग्रेस बड़ी आसानी से अपने दोनों उम्मीदवारों को जीत दिला सकती है. Also Read - Rajasthan Political Crisis: सचिन पायलट के आगे कुआं, पीछे खाई! उपमुख्यमंत्री का क्या होगा अगला कदम?

दूसरी तरह राज्य विधानसभा में भाजपा के 75 विधायक हैं. 51 वोटों के साथ उसके पहले प्रत्यासी की जीत तय है. लेकिन उसके इन 51 वोटों के अलावे 24 वोट बच रहे हैं. उसको अपने दूसरे प्रत्यासी को जीत दिलाने के लिए 27 और वोटों की जरूरत है. जो किसी भी सूरत में आसान नहीं है. सारी सियासत इन्हीं 27 वोटों को लेकर हो रही है. Also Read - Rajasthan Political Crisis: कांग्रेस का 109 से ज्‍यादा एमएलए के समर्थन का दावा, शुरू होने वाली है विधायक दल की बैठक

इस सियासी समीकरण के बीच कांग्रेस को अपने विधायको के क्रास वोटिंग करने का डर सता रहा है. अगर राज्य में कांग्रेस के विधायक क्रास वोटिंग करते हैं और भाजपा अपनी दोनों सीटें निकाल लेती है तो कांग्रेस पार्टी के लिए यह बेहद शर्मनाक स्थिति होगी.

इस संभावित शर्म से बचने के लिए कांग्रेस ने चुनाव से नौ दिन पहले अपने विधायकों को एक रिसॉर्ट में कैद में डाल दिया है.

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और डिप्टी सीएम राजेश पायलट लगातार विधायकों के साथ बैठक कर रहे हैं. लेकिन राजनीतिक गलियारे में यही चर्चा हो रही है कि आखिर कांग्रेस इतना आत्मविश्वास क्यों खो चुका है.