Debate Story: राज्यसभा चुनाव के लिए मीनाक्षी नटराजन का पर्चा खारिज होने पर मचा सियासी बवाल, कांग्रेस ने ऐसे की BJP नेता की बोलती बंद
12 राज्यों की 27 राज्यसभा सीटों पर चुनाव 18 जून को होंगे. नतीजे भी उसी दिन घोषित किए जाएंगे. इसमें मध्य प्रदेश की 3 सीटें शामिल हैं. कांग्रेस कैंडिडेट का पर्चा खारिज होने के बाद मामला BJP के लिए एकतरफा हो गया है.
मीनाक्षी नटराजन कांग्रेस की उन नेताओं में गिनी जाती हैं, जिनकी संगठन में मजबूत पकड़ है. (ANI)
मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है. पार्टी की एकमात्र उम्मीदवार और सीनियर नेता मीनाक्षी नटराजन का नॉमिनेशन रिटर्निंग ऑफिसर ने मंगलवार (9 जून 2026) को रद्द कर दिया. इस फैसले के बाद राज्य में राज्यसभा की तीसरी सीट पर मुकाबले का पूरा समीकरण बदल गया है. कांग्रेस ने चुनाव आयोग से इस मामले की शिकायत की है. पूरे मामले को लेकर सियासी बवाल मचा हुआ है. इसकी एक झलक लाइव टीवी डिबेट में देखने को मिली.
एक प्राइवेट न्यूज चैनल के लाइव टीवी डिबेट में कांग्रेस नेता विक्रांत भूरिया और BJP प्रवक्ता शहजाद पूनावाला आपस में भिड़ गए. पूनावाला ने हर मामले को लेकर कांग्रेस पर विक्टिम कार्ड खेलने का आरोप लगाया. वहीं, कांग्रेस नेता विक्रांत भूरिया ने दो टूक जवाब देकर BJP प्रवक्ता की बोलती बंद कर दी.
BJP ने क्या कहा?
BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने डिबेट में कहा- "आत्ममंथन करने के बजाय, कांग्रेस पार्टी हमेशा विक्टिम कार्ड खेलने लगती है. उन्होंने कर्नाटक में ठहरने का बड़ा इंतजाम किया था और 63 विधायकों के लिए महंगे फ्लाइट टिकट खरीदे थे. उनके विधायकों के पहुंचने से पहले ही खेल खत्म हो गया."
पूनावाला ने आगे कहा, "असल बात यह थी कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने नॉमिनेशन पेपर्स में एक आपराधिक मामले की जानकारी छिपाई थी, जो अपने आप में एक अपराध है. ऐसे में BJP पर तंज कसने, चुनाव आयोग को दोष देने या धरने पर बैठने का क्या मतलब है?"
कांग्रेस का जवाब
डिबेट में शामिल आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया ने कहा, "यह चुनाव आयोग नहीं, बल्कि दलाल आयोग है. आयोग में दलाल भरे पड़े हैं." वहीं, पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल ने कहा- "इस लड़ाई में अगर जान की बाजी लगानी पड़े, खून बहाना पड़े या जेल जाना पड़े, तो कांग्रेस पीछे नहीं हटेगी."
मध्य प्रदेश में BJP के 3 उम्मीदवार
भोपाल में राज्यसभा के रिटर्निग ऑफिसर ने मध्य प्रदेश के राज्यसभा उम्मीदवारों की स्क्रूटनी के बाद फाइनल लिस्ट जारी कर दी. इसमें मीनाक्षी नटराजन का नाम नहीं था. इनमें BJP कैंडिडेट्स तरुण चुग, महेश केवट और रजनीश अग्रवाल के नाम शामिल हैं. मामले को लेकर बुधवार को कांग्रेस डेलीगेशन ने चुनाव आयोग से मुलाकात की थी. इस डेलीगेशन में केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश, रणदीप सुरजेवाला, सचिन पायलट, भूपेश बघेल, विवेक तन्खा शामिल थे.
किस मामले में आया था मीनाक्षी नटराजन का नाम?
मीनाक्षी नटराजन का नाम तेलंगाना में एक पूर्व कांग्रेस कार्यकर्ता द्वारा दायर की गई निजी शिकायत में सामने आया था. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि एक अन्य पूर्व कांग्रेस कार्यकर्ता ने उसका उत्पीड़न किया और उसके साथ छेड़छाड़ की थी. शिकायत में यह भी कहा गया कि उस समय राज्य की AICC प्रमुख रहीं मीनाक्षी नटराजन से संपर्क किया गया था, लेकिन आरोपी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई.
हैदराबाद की मजिस्ट्रेट अदालत ने जारी किया था नोटिस
इसके बाद इस मामले में हैदराबाद की मजिस्ट्रेट अदालत ने साल 2025 में मीनाक्षी नटराजन को नोटिस जारी किया था. नोटिस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी BNSS की धारा 223 के तहत जारी किया गया था. इसका उद्देश्य केवल सुनवाई में उपस्थित होकर जवाब मांगना था. इसलिए कांग्रेस की तरफ से दावा किया जा रहा है कि अदालत ने अभी तक कोई आगे की कार्रवाई नहीं की है और न ही मामले में अपराध का संज्ञान लिया है.
RP Act की धारा 33A क्या कहती है?
इस पूरे विवाद का केंद्र रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट, 1951 की धारा 33A है. यह प्रावधान उम्मीदवारों को अपने खिलाफ पेंडिंग क्रिमिनल मामलों की जानकारी देने के लिए बाध्य करता है. हालांकि, यह बाध्यता हर शिकायत या नोटिस पर लागू नहीं होती. नटराजन का पर्चा खारिज होने के पीछे यही दलील दी जा रही है.
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