नई दिल्ली: राज्य सभा में हिंदू देवी देवताओं के खिलाफ सपा सांसद नरेश अग्रवाल की टिप्पणी को प्रसारित करने को लेकर राज्य सभा सचिवालय ने सुदर्शन न्यूज चैनल को एक विशेषाधिकार हनन नोटिस जारी किया है. दरअसल, उनकी टिप्पणी को सदन की कार्यवाही के रिकार्ड से हटा दिया गया और मीडिया को उसे प्रकाशित या प्रसारित नहीं करने को कहा गया था. Also Read - Naresh Agarwal joins BJP in presence of Piyush goyal | सपा से नाराज नरेश अग्रवाल भाजपा में होंगे शामिल, पहुंचे बीजेपी ऑफिस

संसद के उच्च सदन के 28 सदस्यों ने सभापति हामिद अंसारी को एक अर्जी दे कर आरोप लगाया कि 19 जुलाई को सदन में हुई चर्चा के दौरान अग्रवाल ने जो बयान दिया था उस पर चैनल में अग्रवाल के खिलाफ ‘अपमानजनक टिप्पणी’ की गई है. Also Read - Samajwadi Party leader Naresh Agarwal links name of Hindu Gods with alcohol, sparks controversy | राज्यसभा में नरेश अग्रवाल ने शराब के साथ भगवान के नाम को जोड़ा, मचा हंगामा

चैनल को 21 जुलाई को भेजे गए पत्र में 28 जुलाई तक जवाब देने के लिए कहा गया है और ऐसा नहीं करने पर इस मामले में एकतरफा निर्णय लेने की बात कही गई है. सभापति को दिए 28 सांसदों के हस्ताक्षर वाला एक पत्र भी संलग्न किया गया है, जिसमें कहा गया है कि 19 जुलाई को संक्षिप्त अवधि की चर्चा के दौरान सांसद नरेश अग्रवाल के बयान को लेकर उनके खिलाफ एक टीवी चैनल ‘सुदर्शन’ की अपमानजनक टिप्पणी पर सदन के सदस्यों की शिकायत पर यह सदन संज्ञान लेता है. Also Read - Sudarshan News Editor Suresh Chavhanke accused of spoiling communal atmosphere, arrested from airport | सुदर्शन न्यूज के संपादक सुरेश चव्हाणके पर साम्प्रदायिक माहौल बिगाड़ने का आरोप, एयरपोर्ट से गिरफ्तार

इसमें कहा गया है, यह सदन और सदस्यों के विशेषधिकार के हनन का गंभीर मामला है और इस पर कार्रवाई की जानी चाहिए. सुदर्शन न्यूज ने नोटिस पर एक बयान में कहा कि 28 सांसद विशेषधिकार के बहाने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का मुंह बंद करने की कोशिश कर रहे हैं.

इसके मुख्य संपादक सुरेश चव्हाणके के हवाले से जारी बयान में कहा गया, हिंदू देवी देवताओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी को कभी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.  उन्होंने कहा, भगवान राम के लिए वह मौत का सामना करने को तैयार हैं जबकि 28 सांसद तो बहुत छोटी चीज हैं.

गौरतलब है कि अग्रवाल ने भीड़ द्वारा पीट – पीट कर की जाने वाली हत्या पर चर्चा के दौरान यह विवादास्पद बयान दिया था, जिसपर भाजपा सदस्यों ने फौरन आपत्ति जताई थी और इसके बाद उपसभापति पीजे कुरियन ने उनके बयान को सदन की कार्यवाही के रिकार्ड से हटाने और मीडिया को उसे प्रकाशित या प्रसारित नहीं करने को कहा था.