नई दिल्ली: नव नियुक्त सूचना एवं प्रसारण मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर ने मंगलवार को मीडिया के आत्म अनुशासन अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि सरकार की समाचार पोर्टल और मीडिया वेबसाइट्स के नियमन की कोई योजना नहीं है. ‘‘ सरकार बनाम मीडिया ’’ की बहस को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि उनका मंत्रालय उस दिशा में काम करेगा जहां मीडिया चाहे सार्वजनिक प्रसारक प्रसार भारती हो या निजी चैनल, वे ‘लोगों की आवाज’ बनें.

राठौर ने संवाददाताओं को बताया, ‘‘प्रधानमंत्री इस बात को लेकर बेहद स्पष्ट हैं कि हमारे देश में मीडिया लोकतंत्र का बेहद महत्वपूर्ण स्तंभ है और उन्हें आत्म अनुशासन करना होगा.’’ राठौर ने स्मृति ईरानी की जगह सूचना प्रसारण राज्य मंत्री ( स्वतंत्र प्रभार ) की जिम्मेदारी संभाली है. उनके पास खेल मंत्रालय का प्रभार भी है.

बता दें कि सूचना और प्रसारण मंत्री रहते ईरानी ने फेक न्‍यूज रोकने संबंधी दिशा निर्देश जारी किए थे. ये प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक, दोनों मीडिया के लिए थे. इसमें कहा गया था कि फर्जी खबरें अगर अखबारों से संबंधित हैं तो इनकी शिकायत प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) को भेजी जाएगी. वहीं अगर ये खबरें टीवी चैनलों से संबंधित हैं तो न्यूज ब्रॉडकास्टर एसोसिएशन (एनबीए) शिकायतें सुनेगा. मंत्रालय ने कहा था कि दोनों संस्थाओं को 15 दिनों के भीतर जांच कर यह बताना होगा कि खबर फर्जी है या नहीं. पत्रकारों के लिए जारी दिशा-निर्देशों में मंत्रालय ने कहा था कि कोई पत्रकार अगर फर्जी खबर प्रकाशित करता या प्रसारित करता पाया गया तो पहली बार में उसकी मान्यता छह महीने के लिए निलंबित की जाएगी. दूसरी बार पकड़े जाने पर निलबंन की अवधि एक साल होगी और तीसरी बार की गलती के बाद पत्रकार की मान्यता स्थाई रूप से रद्द कर दी जाएगी. बाद में प्रधानमंत्री के हस्‍तक्षेप के बाद इसे वापस लेना पड़ा था.

इनपुट : एजेंसी