'राम-राम जपने वालों की बोलती बंद क्यों?' सपा का BJP पर तीखा तंज, अनुराग भदोरिया बोले- सवालों से भाग रही सरकार
राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है. जहां एक तरफ अयोध्या पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला. वहीं, अब सपा ने भी सरकार पर तंज कसा है.
राम मंदिर को लेकर बीजेपी और सपा आमने सामने. Image Source- AI
- राम मंदिर में चढ़ावे की गड़बड़ी हुई, लेकिन BJP जवाब देने से बच रही है- अनुराग भदौरिया
- जो राम की बात करते हैं, उन्हें राम मंदिर के चढ़ावे पर भी जवाब देना चाहिए- अनुराग भदौरिया
- अयोध्या की जमीन के बाद अब चढ़ावे पर सवाल, सपा ने फिर उठाई पारदर्शिता की मांग
- करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े मामले में सच सामने आना जरूरी है- अनुराग भदौरिया
Ram Mandir Donation Controversy: अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर उठे विवाद ने अब राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है. कथित चढ़ावा चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अयोध्या दौरा चर्चा का विषय बन गया है. ऐसे समय में जब मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी लगातार पड़ताल कर रही है, विपक्ष को सरकार और मंदिर प्रबंधन पर सवाल उठाने का मौका मिल गया है.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या पहुंचकर विपक्षी दलों पर तीखा पलटवार किया. उन्होंने कहा कि जो लोग आज राम और रामभक्तों के हितों की बात कर रहे हैं, वही लोग अतीत में रामभक्तों के खिलाफ खड़े रहे थे. योगी ने लोगों से संयम रखने की अपील करते हुए कहा कि जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं और कुछ दिनों में पूरे मामले की तस्वीर साफ हो जाएगी. इसपर अब सपा प्रवक्ता अनुराग भदोरिया ने तीखा हमला बोला है.
एक टीवी शो के दौरान समाजवादी पार्टी ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया है. पार्टी के प्रवक्ता अनुराग भदौरिया ने कहा कि मामला केवल आर्थिक अनियमितता का नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का है. उन्होंने आरोप लगाया कि जब राम मंदिर के चढ़ावे में गड़बड़ी की बात सामने आई तो बीजेपी की तरफ से साफ जवाब नहीं दिया गया. उनका कहना है कि समाजवादी पार्टी पहले भी अयोध्या से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाती रही है और इस बार भी वह पारदर्शिता की मांग कर रही है.
कांग्रेस ने भी की जवाबदेही की मांग
कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की है. विपक्षी दलों का कहना है कि अगर जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. इस बीच मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा का बयान भी चर्चा में है. उन्होंने माना कि चढ़ावे की निगरानी व्यवस्था को और ज्यादा मजबूत बनाने की जरूरत है. उनके इस बयान को विपक्ष अपने आरोपों के समर्थन के रूप में पेश कर रहा है, जबकि मंदिर से जुड़े पक्ष इसे व्यवस्था में सुधार की सामान्य प्रक्रिया बता रहे हैं.
राम मंदिर विवाद: https://www.india.com/hindi-news/india-hindi/avimukteshwaranand-ram-mandir-trust-controversy-statement-ayodhya-ram-temple-debate-8451434/
दूसरी तरफ बीजेपी का तर्क है कि विपक्ष जांच पूरी होने से पहले ही राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहा है. पार्टी नेताओं का कहना है कि सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया है और इसी वजह से निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए एसआईटी को जिम्मेदारी सौंपी गई है. फिलहाल राम मंदिर चढ़ावा विवाद केवल प्रशासनिक या कानूनी मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि ये उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा बहस का विषय बन चुका है. अब सभी की निगाहें एसआईटी की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो ये तय करेगी कि आरोपों में कितना दम है और इस पूरे विवाद का अंतिम सच क्या है.
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