मेरी जिंदगी खुली किताब... राम मंदिर चढ़ावा चोरी में घिरे चंपत राय ने पहली बार दी सफाई, भक्तों को लिखा ओपन लेटर
आरोप है कि राम मंदिर ट्रस्ट को दान के जरिए 3264 करोड़ रुपये मिले थे. इनमें से 2370 करोड़ रुपए मंदिर निर्माण और अन्य कार्यों पर खर्च किए जा चुके हैं.
सरकार ने साल 2020 में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया. चंपत राय को ट्रस्ट का महासचिव बनाया गया. (ANI)
- राम मंदिर से 200 करोड़ रुपये से ज्यादा की हुई चोरी
- मंदिर ट्रस्ट में 14 सदस्य, चंपत-अनिल का इस्तीफा
- SIT की रिपोर्ट पर 8 लोगों को किया गया गिरफ्तार
- CJM कोर्ट ने आरोपियों को 14 दिन के लिए भेजा जेल
अयोध्या के राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले में चौतरफा घिरे चंपत राय ने पहली बार सफाई दी है. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा दे चुके चंपत राय ने मंगलवार (7 जुलाई 2026) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर रामभक्तों के लिए ओपन लेटर लिखा. उन्होंने श्रीरामचरितमानस की एक चौपाई के जरिए अपने दिल का हाल बताया. इस चिट्ठी में चंपत राय ने कहा कि अभी ये मुश्किल दौर है. वह इससे उबरने के लिए धैर्य रख रहे हैं.
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है. चंपत राय की जगह नए ट्रस्टी रिटायर्ड IFS कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव बनाया गया है. कृष्ण मोहन दलित समाज से आते हैं. राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर 8 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई थी. इसमें चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा समेत अन्य बड़े पदाधिकारियों के नाम नहीं हैं.
Explainer: राम मंदिर आंदोलन से चढ़ावा चोरी विवाद तक... जानिए चंपत राय की पूरी कुंडली
रामचरितमानस के दोहे से शुरू की चिट्ठी
चंपत राय ने अपने चिट्ठी की शुरुआत श्रीरामचरितमानस की चौपाई से की.उन्होंने लिखा, "धीरज धर्म मित्र अरु नारी, आपद काल परिखिअहिं चारी". चंपत राय ने लिखा,"पिछले 7 जून 2026 से श्री रामजन्मभूमि मन्दिर परिसर के दानपात्र में आए चढ़ावे की गिनती के दौरान हुई चोरी को लेकर कई प्रकार की चर्चाएं चल रही हैं. व्यक्तिगत मेरे ऊपर अनेकों अनर्गल आरोप लगाए गए हैं. मैंने मौन-धारण कर लिया है."
6 जुलाई को हुई थी SIT की प्राइमरी रिपोर्ट
उन्होंने लिखा,"मंदिर ट्रस्ट की 6 जुलाई को हुई बैठक में SIT की प्राथमिक रिपोर्ट पेश की गई. यह रिपोर्ट अब सार्वजनिक हो चुकी है. हालांकि, यह 'परम गोपनीय' थी. आप सभी को आश्वस्त करता हूं कि SIT की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद फैलाये जा रहे सभी पॉइंट पर अपना उत्तर क्रमानुसार दूंगा. सारा सच सामने आ जाएगा."
45 सालों के प्रचारक जीवन का दिया हवाला
इस दौरान चंपत राय ने अपने 45 सालों के प्रचारक जीवन का भी हवाला दिया. उन्होंने खुद को एक खुली किताब बताया. चंपत राय ने लिखा कि मुझे अक्टूबर 1991 से अयोध्या में भेजा गया था. मेरा प्रचारक जीवन 45 वर्ष का है, जहां-जहां मैं रहा, खुली पुस्तक के समान है. सभी को आदर पूर्वक नमन.
कितना आया था चंदा?
ट्रस्ट की स्थापना से लेकर 31 मार्च 2026 तक श्रद्धालुओं से 582 करोड़ रुपये की चढ़ावा राशि प्राप्त हुई. इसमें से 391 करोड़ रुपये ट्रस्ट के संचालन और अन्य खर्चों पर खर्च किए गए. बाकी राशि बैंक खातों में सुरक्षित है.
राम मंदिर चढ़ावा चोरी: ट्रस्ट महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा ने दिया इस्तीफा, आरोपों के बाद था दबाव
कौन हैं चंपत राय?
चंपत राय बिजनौर के नगीना कस्बे के सरायमीर मोहल्ले के रहने वाले हैं. उनके पिता रामेश्वर जीवन के शुरुआती दिनों से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सदस्य थे.चंपत राय अपने 10 भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर हैं.उन्होंने केमेस्ट्री में पोस्ट-ग्रेजुएशन किया है. कुछ समय तक बिजनौर के धामपुर में RSM डिग्री कॉलेज में केमिस्ट्री पढ़ा भी चुके हैं. बाद में वे पूरी तरह सामाजिक और धार्मिक कामों से जुड़ गए. उन्होंने लंबे समय तक विश्व हिंदू परिषद में सक्रिय भूमिका निभाई.
राम की सेवा के लिए नहीं की शादी
चंपत भगवान राम की सेवा में ऐसे लगे कि उन्होंने शादी भी नहीं की. उन्होंने पूरा जीवन राम मंदिर के लिए लगा था. लोग प्यार से उन्हें रामलला का पटवारी भी कहते हैं. चंपत राय ने बाद में RSS ज्वॉइन कर लिया. वो 1975 में आपातकाल के दौरान 18 महीने जेल में रह चुके हैं. जेल से छूटने के बाद उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया और संघ के प्रचारक बन गए.
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में दर्ज हुई पहली FIR, ट्रस्ट ने की थी शिकायत
राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद में कैसे जुड़ा नाम?
जून 2021 में राम मंदिर ट्रस्ट पर अयोध्या में खरीदी गई एक जमीन को लेकर सवाल खड़े हो गए. आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी के नेताओं ने आरोप लगाया था कि कैसे जमीन खरीदारी में हेरफेर किया जा रहा है. शुरुआत में चंपत राय और ट्रस्ट ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया था. न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, चंपत राय कहना था कि सभी भूमि खरीद पारदर्शी तरीके से की गईं. पेमेंट बैंकिंग माध्यमों से हुआ और ट्रस्ट ने मार्केट वैल्यू से कम कीमत पर जमीन खरीदी गई हैं. अब जून 2026 में राम मंदिर के चढ़ावा और चंदा चोरी का मामला सामने आया.
सपा प्रमुख अखिलेश यादव राम मंदिर चंदा चोरी को लेकर राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर लगातार निशाना साध रहे हैं. आरोप है कि ट्रस्ट की नाक के नीचे मंदिर का दान और चढ़ावे की रकम के हिसाब-किताब में हेरफेर की गई. ऐसा बिना ट्रस्ट के पदाधिकारियों की जानकारी के नहीं हो सकता. विपक्ष के हमलावर होने के बाद योगी सरकार ने SIT का गठन किया. SIT की शुरुआती रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद एक्शन शुरू हो गया.
इस्तीफे के बाद आगे क्या?
चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद अब ट्रस्ट नए महासचिव और नए ट्रस्टी की नियुक्ति करेगा. इस बीच दान गबन मामले की जांच जारी रहेगी. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी और किसी को बख्शा नहीं जाएगा.CM योगी ने लोगों से अयोध्या और राम मंदिर की गरिमा पर अनावश्यक सवाल न उठाने की अपील भी की है.
ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें मनोरंजन की और अन्य ताजा-तरीन खबरें