नई दिल्ली| साल 2002 के रेप केस में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को 20 साल की सजा मिलने के बाद पहली बार पीड़िता का बयान सामने आया है. अंग्रेजी अखबरा ‘द हिंदू’ को दिए इंटरव्यू में पीड़िता ने कहा, ‘मुझे इंसाफ मिला है. पीड़िता ने ये भी कहा है कि न मैं पहले डरी थी और न मैं आज डरी हुई हूं.’ सोमवार को सजा सुनाने के दौरान कोई नरमी बरतने से इनकार करते हुए सीबीआई की विशेष अदालत के जज जगदीप सिंह ने कहा कि पीड़ित लड़कियों ने डेरा प्रमुख को भगवान माना, लेकिन उसने उन्हें धोखा किया. इसके बाद, अदालत ने दोनों महिलाओं से बलात्कार करने के जुर्म में गुरमीत को 10-10 साल जेल की सजा सुनाई.

ये दोनों सज़ा एक के बाद एक भुगतनी होंगी यानी डेरा प्रमुख को कुल 20 साल जेल में बिताने होंगे. अदालत ने बलात्कार के दोनों मामलों में डेरा प्रमुख पर 15-15 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया और कहा कि दोनों पीड़ित लड़कियों को मुआवजे के तौर पर 14-14 लाख रुपए मिलेंगे.

सीबीआई अदालत के जज ने कहा कि एक ऐसे व्यक्ति को नरमी पाने का कोई हक नहीं है जिसे न तो इंसानियत की चिंता है और न ही उसके स्वभाव में दया-करूणा का कोई भाव है. उन्होंने कहा कि किसी धार्मिक संगठन की अगुवाई कर रहे व्यक्ति की ओर से किए गए ऐसे आपराधिक कृत्य से देश में सदियों से मौजूद पवित्र आध्यात्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक संस्थाओं की छवि धूमिल होना तय है.

साल 2002 में एक साध्वी ने चिट्ठी लिखकर डेरा प्रमुख पर यौन शोषण का आरोप लगाया था और हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की थी. इस पर सुनवाई के बाद कोर्ट के आदेश पर साल 2001 में पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई और साल 2007 में सीबीआई द्वारा आरोप पत्र दाखिल करने के बाद कोर्ट ने केस पर सुनवाई शुरू की थी. इसके बाद 25 अगस्त को कोर्ट ने राम रहीम को दोषी करार दिया.