नई दिल्ली: अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के मुद्दे पर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने बड़ा बयान दिया है. शाह ने कहा कि राम मंदिर निर्माण बीजेपी की प्राथमिकता है, लेकिन मामला जब तक सुप्रीम कोर्ट में है केंद्र सरकार कोई अध्यादेश नहीं लाएगी. हमारे सहयोगी जी न्यूज के साथ एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में अमित शाह ने कहा कि हम किसी तरह की जल्दबाजी में नहीं हैं. मामला कोर्ट में है और सुप्रीम कोर्ट को ही फैसला लेना है. ऐसे में कोई अध्यादेश लाना ठीक नहीं होगा. यह पूछे जाने पर कि आरएसएस ने कहा था कि अयोध्या में भगवान राम के जन्म स्थान पर मंदिर के निर्माण में तेजी लाने के लिए केंद्र की मोदी सरकार को अध्यादेश लाना चाहिए. शाह ने कहा कि राम मंदिर हमारे लिए एक बड़ा मुद्दा है, लेकिन हमें संवैधानिक तरीके से समाधान खोजना चाहिए.

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राइटविंग एक्टिविस्टों ने 1992 में बाबरी मस्जिद गिरा दी थी. इसके बाद अयोध्या में मंदिर निर्माण के मुद्दे ने राजनीतिक रंग ले लिया था. अयोध्या में विवादित जमीन का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में है. कोर्ट ने जनवरी में सुनवाई की डेट तय की है. हालांकि अमित शाह ने मामले में देरी के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने याद दिलाया कि एक मुस्लिम याचिकाकर्ता का केस लड़ रहे कांग्रेस के सीनियर नेता कपिल सिब्बल कोर्ट में कह चुके हैं कि मामले की सुनवाई 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद हो. उन्होंने कहा कि यह बहुत पुराना केस है और हमारा मानना है कि इसकी जल्द से जल्द सुनवाई होनी चाहिए.

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बीजेपी पर निशाना साधते हुए शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के एक संपादकीय में शुक्रवार को लिखा कि सत्ता में बैठे लोगों को शिवसैनिकों पर गर्व होना चाहिए जिन्होंने रामजन्मभूमि में बाबर राज को खत्म कर दिया. शिवसेना ने कहा कि वह चुनाव के दौरान न तो भगवान राम के नाम पर वोटों की भीख मांगती है और न ही जुमलेबाजी करती है. संपादकीय में लिखा है, “हमारे अयोध्या दौरे को लेकर खुद को हिंदुत्व समर्थक कहने वालों के पेट में दर्द क्यों हो रहा है? हम राजनीतिक मकसद से वहां नहीं जा रहे हैं.” शिवसेना ने दावा किया कि उसने “चलो अयोध्या” का नारा नहीं दिया है. उसने कहा, “अयोध्या किसी की निजी जगह नहीं है. शिवसैनिक वहां भगवान राम के दर्शन करने जा रहे हैं.

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संपादकीय में ये भी कहा गया है, “अयोध्या में अब रामराज नहीं सुप्रीम कोर्ट का राज है. 1992 में बालासाहेब के शिवसैनिकों ने रामजन्मभूमि में बाबर राज को तबाह कर दिया था. फिर भी सत्ता में बैठे लोग उन शिवसैनिकों पर गर्व करने के बजाय उनसे डर और जलन महसूस कर रहे हैं. अयोध्या जा रहे शिवसैनिकों पर तोहमत लगाने की जगह सरकार को मंदिर निर्माण के लिए तारीख बताकर संदेह खत्म करना चाहिए. संपादकीय में कहा गया है कि कि आप राम मंदिर के निर्माण की तारीख क्यों तय नहीं कर रहे हैं? अगर मंदिर निर्माण का मुद्दा आपके हाथ से निकल गया तो 2019 में आपकी रोजी-रोटी के अलावा कई लोगों की जुबान बंद हो जाएगी.