नई दिल्ली: केंद्र सरकार में भाजपा की सहयोगी लोकजन शक्ति पार्टी (लोजपा) प्रमुख रामबिलास पासवान के तेवर बदल गए हैं. केंद्रीय मंत्री पासवान ने भाजपा को अल्पसंख्यकों और दलितों के मामले में बड़े पैमाने पर अपनी धारणा बदलने की नसीहत दी. साथ ही उन्होंने कटाक्ष करते हुए सवाल पूछा कि क्या भाजपा में कोई धर्मनिरपेक्ष नेता नहीं है? Also Read - 'टाइगर अभी ज़िन्दा है' को उमा भारती का जवाब- मैं 'मोगली' हूं, शेरों की सवारी करती हूं

केंद्र सरकार के खिलाफ सहयोगी दल लगातार बयानबाजी कर अपने बगावती सुर दिखा रहे हैं. अभी कुछ दिन पहले ही टीडीपी ने भाजपा से रिश्ता तोड़ लिया है. वहीं शिवसेना ने पहले ही आने वाले लोकसभा में अलग चुनाव लड़ने के संकेत दिए हैं. ऐसे में भाजपा रूठों को मनाने में लगी हुई थी कि लोकसभा उपचुनाव में यूपी की दो महत्वपूर्ण सीटों पर उसकी पराजय ने और मुश्किल खड़ी कर दी. चौतरफा संकट को देखते हुए भाजपा हाईकमान जहां सहयोगी दलों को साथ लाने और उनकी मान-मन्नौवल में लगा हुआ है, वहीं लोकजन शक्ति पार्टी प्रमुख रामबिलास पासवान का बनाया परेशानियां बढ़ाने वाला है.

बिना सोचे-समझे टिप्पणी करने से बचे एनडीए के नेता

केंद्रीय मंत्री रामबिलास पासवान ने कहा कि उत्तरप्रदेश ओर बिहार उपचुनावों में खराब प्रदर्शन को देखते हुए एनडीए के नेताओं को बिना सोचे-समझे टिप्पणी करने से बचना चाहिए. साथ ही जब चुनाव नजदीक हों तो ऐसे समय और भी हाशियारी बरतनी चाहिए. उन्होंने केंद्र में सत्तारूढ़ एनडीए के कुछ नेताओं द्वारा समय-समय पर की जाने वाली टिप्पणियों को लेकर चिंता जताई. क्योंकि उन बयानों से ऐसा संदेश गया कि गठबंधन समाज के कुछ वर्गों के खिलाफ है.

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