Rape Atrocity In Tamil Nadu Village Madras Hc Sends Officials To Jail
31 साल पहले छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने किया था 18 महिलाओं का रेप, HC ने 215 अधिकारियों को भेजा जेल
Rape Case: 2011 में, धर्मपुरी की एक सत्र अदालत ने मामले के सिलसिले में 126 वन कर्मियों को दोषी ठहराया, जिनमें चार भारतीय वन सेवा अधिकारी, 84 पुलिसकर्मी और पांच राजस्व विभाग के अधिकारी शामिल थे.
Rape Case: तमिलनाडु के एक गांव में रेप के मामले में मद्रास हाईकोर्ट (Madras High Court) ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया. सभी अपीलों को खारिज कर 215 अधिकारियों को जेल भेजा. हाईकोर्ट ने सत्र अदालत के आदेश को बरकरार रखा. जिसमें 215 वन, पुलिस और राजस्व विभागों के सभी अधिकारियों को 1992 में चंदन की लकड़ी की तस्करी के लिए छापेमारी के दौरान यौन उत्पीड़न सहित अत्याचार का दोषी ठहराया गया था. जस्टिस पी वेलमुरुगन ने अपने आदेश में कहा, “इस अदालत ने पाया है कि सभी पीड़ितों और अभियोजन पक्ष के गवाहों के साक्ष्य ठोस और सुसंगत हैं, जो विश्वसनीय हैं. अभियोजन पक्ष ने अपने साक्ष्य के माध्यम से अपना मामला साबित कर दिया है.”
क्या है पूरा मामला?
20 जून 1992 को, अधिकारियों ने चंदन की लकड़ी की तस्करी के दौरान तमिलनाडु के धर्मपुरी जिले के एक आदिवासी गांव वाचथी में छापा मारा. छापे के दौरान, संपत्ति और पशुधन का व्यापक विनाश हुआ और 18 महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया.
2011 में, धर्मपुरी की एक सत्र अदालत ने मामले के सिलसिले में 126 वन कर्मियों को दोषी ठहराया, जिनमें चार भारतीय वन सेवा अधिकारी, 84 पुलिसकर्मी और पांच राजस्व विभाग के अधिकारी शामिल थे. 269 आरोपियों में से 54 की मुकदमे के दौरान मृत्यु हो गई, और शेष 215 को 1 से 10 साल तक जेल की सजा सुनाई गई. फैसले को बरकरार रखते हुए, उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को सत्र अदालत को सजा की शेष अवधि काटने के लिए सभी आरोपियों की हिरासत तुरंत सुरक्षित करने का निर्देश दिया.
जस्टिस वेलमुरुगन ने तमिलनाडु सरकार को यह भी आदेश दिया कि 2016 में एक खंडपीठ के आदेश के अनुसार प्रत्येक बलात्कार पीड़िता को तुरंत 10 लाख रुपये का मुआवजा जारी किया जाए और अपराध के लिए दोषी ठहराए गए पुरुषों से 50% राशि वसूल की जाए. अदालत ने राज्य को आरोपियों को बचाने के लिए तत्कालीन जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और जिला वन अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया.
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