नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कानून के शासन को सर्वोच्च बताते हुए कहा कि बलात्कार की घटनाएं पीड़ा पहुंचाती हैं और बलात्कारियों के लिए मौत की सजा को प्रचारित किये जाने की जरूरत है ताकि ऐसी राक्षसी प्रवृति वाले लोगों के मन में भय पैदा हो. प्रधानमंत्री ने कहा कि महिलाओं के लिए न्याय और हक़ को पूरा करने में मैं कोई कमी नहीं रखूंगा और ऐसी राक्षसी प्रवृति पर प्रहार करने और महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान अक्षुण्ण बनाये रखने के लिए मैं प्रतिबद्ध हूं .

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विकास में कंधे से कंधा मिलाकर चल रही
72वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किला से रा संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि भारत की महिलाएं देश के विकास में कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं. खेत से लेकर खेल के मैदान तक महिलाएं योगदान दे रही हैं और स्कूल से लेकर सेना तक कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं.

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पीड़िता से ज्यादा पीड़ा हमें होनी चाहिए
पीएम ने कहा कि ऐसे समय में कुछ राक्षसी शक्तियां भी हैं. बलात्कार की घटनाएं पीड़ा पहुंचाती हैं. हमें पीड़िता से ज्यादा पीड़ा होनी चाहिए. इस बुराई से देश को मुक्त करना होगा. मोदी ने कहा कि हमें राक्षसी प्रवृत्ति पर प्रहार करने की आवश्यकता है. हम महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को अक्षुण्ण रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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विकृति पर प्रहार करने की जरूरत है
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले दिनों मध्यप्रदेश के कटनी में पांच दिनों में बलात्कारियों को फ़ांसी की सज़ा सुनाई गई. राजस्थान में भी ऐसा हुआ. इन ख़बरों को प्रचारित किया जाना चाहिए, जिससे इन राक्षसों को भय होगा. उन्होंने कहा, ” इस मानसिकता, सोच, विकृति पर प्रहार करने की ज़रूरत है. महिलाओं के न्याय, हक को पूरा करने में मैं कोई कमी नहीं रखूंगा. हमारे लिए कानून का शासन सर्वोच्च है. इससे कोई समझौता नहीं किया जा सकता.”

सुप्रीम कोर्ट, केंद्रीय कैबिनेट से लेकर सात समंदर तक महिलाशक्ति
महिलाओं के योगदान का जिक्र करते प्रधानमंत्री ने कहा कि आज देश के कैबिनेट में सबसे ज्यादा महिला मंत्री हैं, सुप्रीम कोर्ट में आज तीन महिला जज हैं. उन्होंने कहा, ”हमने सशस्त्र सेनाओं में महिलाओं को स्थाई सर्विस देने का फैसला किया है.’ उन्होंने कहा कि आजादी का यह पर्व हम तब मना रहे हैं जब हमारी बेटियों…. उतराखंड, हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश की बेटियों ने सात समंदर पार किया और सातों समंदर को तिरंगे रंग से रंगकर लौट आई.

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