नई दिल्लीः सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के बीच जारी तकरार के बचाव में मोदी सरकार को एक धारदार हथियार हाथ लगा है. इस हथियार के जरिए सरकार विपक्ष खासकर राहुल गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस के आरोपों को कुंद कर सकती है. दरअसल, RBI और सरकार के बीच विभिन्न मसलों पर जारी तनाव की प्रकृति नयी नहीं है. इतिहास में इससे पहले भी कई दफा ऐसी परिस्थितियां पैदा हुई हैं. अंग्रेजी शासन के दौरान 1937 में भी तत्कालीन सेंट्रल बैंक (इसे ही आजादी के बाद RBI नाम दिया गया) के गवर्नर सर जॉन ऑसबोर्न स्मिथ ने ब्याज और विनिमय दरों पर मतभेद को लेकर इस्तीफा दे दिया था. Also Read - RBI Recruitment 2021: भारतीय रिजर्व बैंक में इन विभिन्न पदों पर निकली वैकेंसी, आवेदन प्रक्रिया आज से हुई शुरू, जल्द करें अप्लाई

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टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक इसके बाद स्वतंत्र भारत में प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल में एक बार ऐसा हुआ कि रिजर्व बैंक के गवर्नर को अपना पद छोड़ना पड़ा. दरअसल, 1957 में सर बेनेगल राम राऊ रिजर्व बैंक के गवर्नर थे. वह प्रशासनिक सेवा के अधिकारी थे. जनवरी 1957 में करीब साढ़े सात साल की सेवा के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था. उस वक्त सरकार की विभिन्न नीतियों को लेकर रिजर्व बैंक और तत्कालीन वित्त मंत्री कृष्णामचारी के बीच ठन गई थी. इसके बाद प्रधानमंत्री नेहरू ने अपने मंत्री का पक्ष लेते हुए बकायदा रिजर्व बैंक के गवर्नर को पत्र लिखा कि RBI का काम सरकार को सलाह देना है. लेकिन इसके साथ ही उसे सरकार की नीति और उद्देश्यों का यह ध्यान रखना होगा. इसके साथ ही पत्र में उन्होंने सुझाव दिया कि अगर गवर्नर को सरकार के साथ काम करने में दिक्कत आ रही है तो वह इस्तीफा दे सकते हैं. इसके बाद राऊ ने सरकार को अपना इस्तीफा भेज दिया था. Also Read - RBI Recruitment 2021: 10वीं पास के लिए RBI में इन 841 पदों पर निकली वैकेंसी, आवेदन प्रक्रिया शुरू, जल्द करें अप्लाई

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अभद्र वित्त मंत्री

दरअसल, राऊ ने तत्कालीन वित्त मंत्री पर अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया था. इन दोनों के बीच बजट प्रस्तावों को लेकर तकरार शुरू हुआ था. इस पूरे प्रकरण में नेहरू ने वित्त मंत्री का साथ दिया था. नेहरू ने RBI को भेजे पत्र में कहा था कि अगर केंद्रीय बैंक सरकार के उद्देश्यों या उसके तरीकों से सहमत नहीं है तो वह अलग नीति पर चले, यह पूरी तरह असंगत है. उन्होंने आगे कहा था कि आपने (RBI) स्वयत्ता की बात कही है. निश्चित रूप से  RBI स्वायत्त है, लेकिन यह सरकार के निर्देशों के अनुरूप भी है. मौद्रिक नीतियां निश्चित रूप से सरकार की नीतियों के अनुरूप होनी चाहिए. RBI सरकार को सलाह दे सकता है लेकिन वह सरकार के उद्देश्यों और नीतियों को चुनौती नहीं दे सकता.

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नेहरू ने आगे लिखा था कि जब आपने मुझसे बात की थी तो मैंने आपसे कहा था कि नीतियां बनाना केंद्र सरकार का काम है और निश्चित रूप से RBI ऐसी कोई नीति नहीं बना सकता जो सरकार की नीतियों के उलट हो. आप इस मसले पर मुझसे सहमत थे. अब मैं आपके मेमोरेंडर में एक अलग ही विचार देखता हूं.

उस वक्त कृष्णामचारी द्वारा पेश बजट को लेकर RBI ने सवाल उठाए थे. RBI ने कहा था इन बजट प्रस्तावों से ब्याज दरें बढ़ेंगी और इस बारे में एक प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया था. 12 दिसंबर 1956 को RBI बोर्ड ने सरकार को एक अनुरोध भेजा कि वह मौद्रिक ढांचे और नीतियों को प्रभावित करने वाले मामले पर कोई भी फैसला करने से पहले RBI से सलाह ले. उसी दिन नेहरू ने RBI को पत्र लिखकर उसकी आलोचना की थी.