नई दिल्ली: केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति के कार्यालय से कहा है कि वे सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीलैड) के तहत धन के इस्तेमाल में सांसदों और अन्य संगठनों की पारदर्शिता, जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए कानूनी ढांचा विकसित करें. आयोग ने 54 पन्नों के विस्तृत आदेश में एमपीलैड के विभिन्न पहलुओं पर विचार किया. इसके बाद कुछ कड़ी सिफारिशें की गई हैं. दअरसल, प्रत्येक सांसद को अपने संसदीय क्षेत्र में योजनाओं पर खर्च करने के लिए हर साल पांच करोड़ रुपए दिए जाते हैं. लेकिन कई सांसद इस राशि का पूरा उपयोग नहीं करते हैं. सांसद निधि के खर्च को लेकर कई तरह के सवाल रहे हैं. बता दें कि 12000 करोड़ रुपए का कोष अभी तक खर्च नहीं किए गए. सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की एक रिपोर्ट ये बात सामने आई है.

एमपीलैड की राशि खर्च नहीं करने की रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलू ने लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति कार्यालय को कानूनी ढांचा विकसित करने की सिफारिश की. इसमें विशेष कर्तव्य एवं अनिवार्य पारदर्शिता दायित्व, कर्तव्य का उल्लंघन की परिभाषा, नियम और नियमन बताने के अतिरिक्त कोष से संबंधित कर्तव्यों के पालन में लापरवाही और उन नियमों और नियमनों का उल्लंघन करने के लिए जवाबदेही तय करने की बात कही गई है.

सूचना आयुक्त ने कहा कि इस ढांचा के तहत शामिल कदमों में एमपीलैड के तहत सृजित संपत्तियों का पता नहीं चलने, सांसदों के निजी कार्यों के लिए कोष के इस्तेमाल, कार्य के लिए अयोग्य एजेंसियों की सिफारिश, निजी ट्रस्ट को धन का डायवर्जन और एमपीलैड के तहत सांसदों या उनके रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने वाले कामों की सिफारिश पर रोक लगाने जैसे मुद्दे शामिल हो सकते हैं.

उन्होंने यह भी सिफारिश की कि ढांचे में यह भी शामिल हो सकता है कि प्रत्येक सांसद अपना कार्यकाल समाप्त होने पर एमपीलैड के तहत कार्यों पर व्यापक रिपोर्ट राज्यसभा सभापति या लोकसभा अध्यक्ष को सौंपेगा.

आचार्युलू ने कहा कि रिपोर्ट में सूचना के अधिकार कानून के तहत इस तरह के कार्यों का ब्योरा मांगने वाले मतदाताओं को जानकारी देने का सांसद का कर्तव्य और संसदीय दल का अपनी आधिकारिक वेबसाइट और सांसद के वेब पन्ने पर इसका ब्योरा देने का कर्तव्य भी शामिल हो सकता है. उन्होंने कहा कि ढांचा में संसदीय सचिवालय के कर्मचारी और नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर के लिए प्रावधान हो सकता है जो इन पारदर्शिता दायित्वों को पूरा करने में संसदीय दलों की सहायता करेंगे. यह मामला सीआईसी के समक्ष तब आया जब दो आरटीआई आवेदकों को अपने सांसदों द्वारा एमपीलैड कोष का इस्तेमाल किये जाने के बारे में सूचना नहीं मिल सकी.