मुंबई. देश के 8 बड़े शहरों में बिल्डरों पर 4 लाख करोड़ रुपये का बकाया है. ये बकाया अलग-अलग बैंक और एनबीएफसी के हैं. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इन बिल्डर्स की सलाना बिक्री सिर्फ 2.47 लाख करोड़ है. ये रिपोर्ट रियल इस्टेट रिसर्च इंस्टीट्यूट ‘लियासेस फोरस’ की उस रिपोर्ट पर है जिसे 11,000 डेवलपर्स पर स्टडी करके जारी किया गया है. ये 8 शहर मुंबई बीएमसी एरिया, एनसीआर, पुणे, हैदराबाद, चेन्नई, बेंगलुरु, अहमदाबाद और कोलकाता हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि जिस दर से हर साल कमाई हो रही है उसे देखा जाए तो लोन की बेस आउटस्टैंडिंग अमाउंट के क्लियर होने में कम से कम 7 साल लगेंग. इस लोन की सलाना ईएमआई 1.28 लाख करोड़ है. दूसरी तरफ देखें तो इन 11,000 डेवलपर्स की कमाई मुश्किल से 57,000 करोड़ (इंट्रेस्ट और टैक्स के अलावा) है. रिपोर्ट में कहा गया है कि आईएल एंड एफएस के डिफाल्ट होने और डीएचएफल को लेकर जिस तरह के बाजार में कयास लगाए जा रहे हैं उससे इंडस्ट्री के स्टॉकहोल्डर्स काफी चिंतित हैं.

प्राइस करेक्शन पर करना होगा विचार
रिपोर्ट में लियासेस फोरस के हवाले से कहा गया है कि जिस तरह की स्थिति बन रही है वह दर्शाती है कि इंडस्ट्री संक्रमण के बिंदु पर है और अपनी बिक्री को बढ़ाने के लिए वह लंबे समय से रुकी हुई प्राइस करेक्शन पर विचार कर सकता है. इसमें ये भी कहा गया है कि बिल्डर्स 15% के फायदे की भी बात करें तो भी उन्हें ग्रोथ करने के लिए 2.6 गुना ज्यादा सेल करना पड़ेगा जिससे वह वर्तमान स्तथिति को व्यवस्थित कर सकें.

पिछले दशक की ये है स्थिति
पिछले दशक की बात करें तो बेचे गए स्टॉक की कीमत 1.56 गुनी बढ़ी थी. वहीं, ऐसे स्टॉक जो नहीं बिके उनकी कीमत 4.72 गुना बढ़ा. ऐसे में सेल्स भी 1.28 गुना बढ़ गया था. वहीं, इन्वेंट्री वृद्धि साल 2009 से 2018 के बीच 3.33 गुना बढ़ गई. इसी दौरान रियल स्टेट कारोबार 1.2 लाख करोड़ से 4 लाख करोड़ का हो गया.